स्वास्थ्य

आईआईएससी के ब्रेन रिसर्च सेंटर ने संज्ञानात्मक गिरावट की प्रारंभिक पहचान के लिए ₹2 करोड़ की एआई चुनौती शुरू की

बेंगलुरु, कर्नाटक। भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र ने एक महत्वपूर्ण पहल के तहत ₹2 करोड़ की पुरस्कार राशि वाली एक चुनौती लॉन्च की है, जिसका उद्देश्य संज्ञानात्मक गिरावट की शुरुआती पहचान के लिए नवीनतम तकनीकों को प्रोत्साहित करना है। इस प्रतियोगिता के जरिए शोधकर्ताओं और डेवलपर्स को आमंत्रित किया गया है कि वे नई और प्रभावी तकनीकें विकसित करें जो वृद्धावस्था में होने वाली मानसिक कमजोरी का शीघ्र पता लगाने में सहायक हों।

प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आवेदन 20 अप्रैल से 20 मई तक खुले रहेंगे। इस अवधि में प्राप्त सभी आवेदनों की विशेषज्ञ जूरी द्वारा कठोर समीक्षा की जाएगी। जूरी में मस्तिष्क विज्ञान, न्यूरोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञ सम्मिलित हैं, जो प्रत्येक प्रोजेक्ट के तकनीकी पहलुओं, नवाचार और व्यावहारिकता का बारीकी से मूल्यांकन करेंगे।

आईआईएससी के सेंटर फॉर ब्रेन रिसर्च के निदेशक डॉ. राजीव शर्मा ने बताया कि वर्तमान युग में वृद्धावस्था से जुड़ी संज्ञानात्मक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, और इनके समय पर निदान से मरीजों की जीवन गुणवत्ता में काफी सुधार संभव है। उन्होंने कहा, “इस चुनौती के माध्यम से हम उन तकनीकी नवाचारों को पहचानना चाहते हैं जो न केवल सटीक हैं, बल्कि उपयोग में भी आसान हों। हमारा लक्ष्य है कि भविष्य में ऐसी तकनीकों का उपयोग कर हम समय से पहले ही रोगों की पहचान कर सकें।”

प्रतियोगिता का उद्देश्य खासकर उन समाधानों को प्रोत्साहित करना है जो भाषा, संस्कृति और व्यवहार में विविधता को ध्यान में रखते हुए व्यापक सामाजिक उपयोग के लिए तैयार हों। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि भारत जैसे बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक देश में यह तकनीक प्रभावी रूप से लागू की जा सके।

प्रतिभागी इस पहल में व्यक्तिगत, स्टार्टअप, अकादमिक संस्थान या तकनीकी कंपनियां हो सकती हैं। आईआईएससी द्वारा उपलब्ध कराई गई वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन से विजेताओं को शोध के अगले चरणों में भी मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रतियोगिताएं नई सोच को मंच प्रदान करती हैं और तकनीकी समाधान की दिशा में सकारात्मक बदलाव लाती हैं। आईआईएससी की यह पहल न केवल वैज्ञानिक समुदाय के लिए बल्कि आम लोगों के लिए भी उम्मीद की किरण साबित होगी, क्योंकि इससे मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आने की संभावना है।

अधिक जानकारी और आवेदन की प्रक्रिया के लिए इच्छुक प्रतिभागी आईआईएससी के आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं। समय सीमा नजदीक है, इसलिए सभी को प्रोत्साहित किया गया है कि वे अपनी परियोजनाओं को जल्द भेजें और इस चुनौती का हिस्सा बनें।

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