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अस्थायी उतार-चढ़ाव और एफडीआई निकासी पर सख्त नजर: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा

न्यूयॉर्क, अमेरिका। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 20 अप्रैल को न्यूयॉर्क स्थित भारतीय कौंसुलेट जनरल द्वारा आयोजित एक राउंड-टेबल बैठक में कहा कि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के प्रवाह और निकासी में होने वाले छोटे अवधि के उतार-चढ़ाव पर रिजर्व बैंक कड़ी नजर रखे हुए है।

इस बैठक में उन्होंने वित्तीय बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए लागू की जा रही नीतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि हालांकि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी संरचना मजबूत बनी हुई है, जिससे निवेशकों का विश्वास बना हुआ है।

रिजर्व बैंक गवर्नर ने कहा, “हम समझते हैं कि फंड्स का बहिर्गमन और फिर आना आम बात है, खासकर वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के समय। इसलिए इस पर नजर रखना और अपने निर्णयों को सतर्कता से लेना सरकार व RBI की प्राथमिकता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि RBI ने हाल ही में मुद्रा नीति को इस तरह से तैयार किया है कि वह पूंजी के आवागमन को संतुलित करने के साथ-साथ विदेशी निवेशकों के भरोसे को मज़बूत कर सके। मल्होत्रा ने यह भी रेखांकित किया कि निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाए रखना RBI और सरकार दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी है।

इस राउंड-टेबल की मेज़बानी भारतीय कौंसुलेट जनरल न्यूयॉर्क ने की, जिसमें वित्तीय विशेषज्ञ, निवेशक और नीति निर्माताओं ने हिस्सा लिया। यह बैठक भारत के वित्तीय क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों और अवसरों पर विचार विमर्श का अवसर थी।

विशेषज्ञों ने RBI की सावधानीपूर्ण नीति रवैये की सराहना की और संकेत दिया कि यह कदम विदेशी निवेश को बनाए रखने में सहायक होगा। साथ ही, उन्होंने यह भी सलाह दी कि लंबी अवधि के सामरिक फैसलों के तहत भारत को अपने अर्थव्यवस्था के विविधीकरण को और तेज करने की आवश्यकता है ताकि वैश्विक बाज़ार के उतार-चढ़ाव के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके।

रिजर्व बैंक गवर्नर ने अपनी बात को समाप्त करते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत आधारों पर खड़ी है और निवेशक इसे समझ रहे हैं। RBI निरंतर दृष्टि के साथ निर्णय ले रहा है ताकि वित्तीय स्थिरता बनी रहे और आर्थिक विकास की गति निरंतर बनी रहे।

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