शिक्षा

वेदांत श्रीवास्तव, निसर्गा अधिकारी और सार्थक सिद्धांत | वो Gen Z ट्रियो जिसने CBSE को चुनौती दी

नई दिल्ली, दिल्ली | 27 अप्रैल 2024

सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाने वाले तीन छात्रों को अब न्याय मिला है। ये तीनों छात्र, वेदांत श्रीवास्तव, निसर्गा अधिकारी और सार्थक सिद्धांत, जिन्हें सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था, ने अपनी बात सही साबित कर दी है। हाल ही में सीबीएसई ने इस सिस्टम में तकनीकी खामियों को स्वीकार किया है, जिससे छात्रों की नाराजगी और आशंकाएं सही साबित हुईं।

यह प्रणाली, जिसे 2023 में व्यापक रूप से लागू किया गया था, छात्रों और अभिभावकों के बीच विवाद का विषय बनी। ऑन-स्क्रीन मार्किंग के तहत परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं डिजिटल माध्यम से मूल्यांकन के लिए भेजी जाती हैं, जिससे पारदर्शिता और त्वरित परिणाम की उम्मीद थी। हालांकि, इस प्रक्रिया में तकनीकी समस्याएं सामने आईं, जिनमें अंकांकन में गड़बड़ी और गलतफहमियां शामिल थीं।

वेदांत, निसर्गा और सार्थक ने सार्वजनिक मंचों पर इस विषय को उठाकर प्रश्न किया कि क्या छात्रों के अंक सही तौर पर दर्ज किए जा रहे हैं। उनका यह कदम सरकार और बोर्ड दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण था, जिसके कारण कई लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बनाया। लेकिन उनका हस्तक्षेप आखिरकार सार्थक रहा जब सीबीएसई ने अपने सिस्टम की कमियों को स्वीकारा और सुधार के लिए कदम उठाने की बात कही।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना शिक्षा प्रणाली में छात्रों की भागीदारी और उनकी आवाज को मान्यता देने की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद आवश्यक है, जिससे छात्रों को विश्वास हो कि उनका मूल्यांकन सही ढंग से किया जा रहा है।

सीबीएसई प्रवक्ता ने भी स्वीकार किया है कि तकनीकी खामियों के कारण कुछ छात्रों को असुविधा हुई है और उन्होंने संबंधित समस्याओं के निवारण के लिए एक समीक्षा टीम गठित की है। बोर्ड की ओर से यह भी कहा गया कि भविष्य में ऐसी तकनीकी विफलताओं को रोकने के लिए नयी तकनीकों और बेहतर प्रशिक्षण पर जोर दिया जाएगा।

इस घटना ने छात्रों को सशक्त बनाने और उनकी बात को सुने जाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है। वेदांत, निसर्गा और सार्थक जैसे युवा ही बदलाव की दिशा तय करते हैं, जो भविष्य की शिक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और विश्वसनीय बना सकते हैं। उनका यह संघर्ष न केवल उनके लिए बल्कि अन्य छात्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना है।

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