महिलाएं इंजीनियरिंग में क्यों नहीं टिक पा रही हैं

नई दिल्ली, भारत | 27 जून 2024
इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी बड़ी संख्या में महिलाएं इस क्षेत्र में काम करना या बने रहना चुनती नहीं हैं। इसे विशेषज्ञ “लीकी पाइपलाइन” समस्या के रूप में पहचानते हैं। इस समस्या का अर्थ है कि डिग्री हासिल करने के बाद महिलाएं काम की दुनिया में प्रवेश तो करती हैं, लेकिन समय के साथ वे बाहर निकल जाती हैं और वापस लौटती नहीं हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत समेत विश्व के कई देशों में यह समस्या गंभीर रूप से देखने को मिलती है। तकनीकी और इंजीनियरिंग फील्ड में महिलाओं की संख्या बढ़ी है, परंतु नौकरी में बने रहना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। कंपनियां और समाज दोनों में मौजूद पूर्वाग्रह, कार्य माहौल, असंतुलित पारिवारिक जिम्मेदारियां और करियर बढ़ाने के अवसरों में असमानता इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं।
महिला इंजीनियर युवाओं की आवाज़ उठाती हैं कि कई बार कार्यस्थल पर लैंगिक भेदभाव और बराबरी की कमी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना भी एक बड़ी चुनौती है। कई महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के चलते नौकरी छोड़ने को मजबूर होती हैं।
सरकार और कई गैर-सरकारी संगठन इस स्थिति को सुधारने के लिए विभिन्न पहल कर रहे हैं। कार्यस्थल पर लैंगिक समावेशन को बढ़ावा देने के लिए नीतियां बन रही हैं, जैसे कि मातृत्व अवकाश, काम के समय में लचीलापन, और महिलाओं के लिए करियर विकास कार्यक्रम। इसके साथ ही, महिलाओं को विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रेरित करने के लिए छात्रवृत्ति तथा मेंटरशिप प्रोग्राम भी संचालित किए जा रहे हैं।
फिर भी, विशेषज्ञों का मानना है कि बदलाव धीरे-धीरे हो रहा है और असली सुधार के लिए ना केवल नीतियां, बल्कि समाज की सोच में भी बदलाव जरूरी है। घर और कार्यस्थल दोनों जगह महिलाओं को बराबर अवसर मिलना चाहिए ताकि वे इंजीनियरिंग क्षेत्र में अपना करियर बनाए रख सकें।
अंततः, लीकी पाइपलाइन की समस्या को खत्म करना तब ही संभव होगा जब हम महिलाओं के संघर्ष को समझेंगे और उनके लिए सहायक वातावरण बनाएंगे। तभी इंजीनियरिंग क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और योगदान में वृद्धि होगी और वे इस क्षेत्र में लंबे समय तक टिक पाएंगी।



