12 अगस्त को आसमान में दिखेगा अद्भुत नजारा, 24 घंटे में 3 बड़ी खगोलीय घटनाएं; ग्रहों की कतार से सूर्यग्रहण और उल्का बौछार तक

नई दिल्ली, दिल्ली
12 अगस्त 2026 की तारीख खगोल विज्ञान में दिलचस्पी रखने वालों के लिए बेहद खास होने जा रही है। इस दिन करीब 24 घंटे के भीतर आसमान में तीन प्रमुख खगोलीय घटनाएं देखने को मिलेंगी। सुबह सूर्योदय से पहले कई ग्रहों की कतार नजर आएगी, दिन में पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा और रात में पर्सिड उल्का बौछार देखने का अवसर मिलेगा। इन तीनों घटनाओं का एक ही तारीख के आसपास होना खगोल प्रेमियों के लिए दुर्लभ संयोग माना जा रहा है।
सुबह नजर आएंगे कई ग्रह
12 अगस्त की सुबह सूर्योदय से करीब 30 से 60 मिनट पहले आसमान में कई ग्रह एक साथ नजर आएंगे। इस खगोलीय दृश्य में बुध, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून शामिल होंगे।
इन ग्रहों में मंगल, बृहस्पति और शनि को अनुकूल परिस्थितियों में नंगी आंखों से देखा जा सकता है। वहीं यूरेनस और नेपच्यून अपेक्षाकृत कम चमकीले होने के कारण इन्हें देखने के लिए बाइनोकुलर या टेलिस्कोप की जरूरत पड़ सकती है। बुध को देखने के लिए भी स्थान और क्षितिज की स्पष्टता महत्वपूर्ण होगी।
ग्रहों का एक ही क्षेत्र में दिखाई देना खगोल विज्ञान के शौकीनों के लिए खास अनुभव होगा। हालांकि, सभी ग्रहों का बिल्कुल सीधी रेखा में होना जरूरी नहीं है। वे आकाश में एक विस्तृत पट्टी के भीतर दिखाई देते हैं।
दिन में होगा पूर्ण सूर्य ग्रहण
इसी दिन दिन के समय पूर्ण सूर्य ग्रहण भी होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पूर्ण ग्रहण का मार्ग ग्रीनलैंड, आइसलैंड और यूरोप के कुछ हिस्सों से होकर गुजरेगा। उत्तरी स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में भी पूर्ण ग्रहण देखने का अवसर मिल सकता है।
ग्रहण के दौरान चंद्रमा कुछ समय के लिए सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा और पूर्ण ग्रहण के मार्ग में दिन के समय कुछ देर के लिए अंधेरा जैसा वातावरण बन सकता है। आइसलैंड के आसपास समुद्री क्षेत्र में पूर्ण ग्रहण की अवधि करीब 2 मिनट 18 सेकंड तक रहने की जानकारी दी गई है।
यूरोप के अन्य हिस्सों के अलावा कनाडा और उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में यह ग्रहण आंशिक रूप में दिखाई देगा।
सूर्य ग्रहण को लेकर विशेषज्ञों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। सूर्य को सीधे देखने से आंखों को गंभीर और स्थायी नुकसान हो सकता है। ग्रहण देखने के लिए केवल प्रमाणित सोलर सेफ्टी ग्लास का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। सामान्य धूप के चश्मे सूर्य ग्रहण देखने के लिए सुरक्षित नहीं होते।
रात में पर्सिड उल्का बौछार
12 अगस्त की रात खगोल प्रेमियों के लिए एक और आकर्षण लेकर आएगी। इस दौरान पर्सिड उल्का बौछार सक्रिय रहेगी। आसमान साफ होने और प्रकाश प्रदूषण कम होने पर चमकीली उल्काएं तेजी से आकाश से गुजरती हुई दिखाई दे सकती हैं।
इस साल इस घटना के लिए एक महत्वपूर्ण फायदा यह होगा कि चंद्रमा की रोशनी अपेक्षाकृत कम रहेगी, जिससे उल्काओं को देखने की परिस्थितियां बेहतर हो सकती हैं। पर्सिड उल्का बौछार के चरम समय पर आदर्श परिस्थितियों में प्रति घंटे बड़ी संख्या में उल्काएं दिखाई दे सकती हैं, हालांकि वास्तविक संख्या स्थान, मौसम और प्रकाश प्रदूषण पर निर्भर करेगी।
इस तरह 12 अगस्त 2026 सुबह ग्रहों के संयोग, दिन में पूर्ण सूर्य ग्रहण और रात में पर्सिड उल्का बौछार के कारण खगोल प्रेमियों के लिए बेहद खास तारीख बनने जा रही है। हालांकि, इन घटनाओं की दृश्यता हर स्थान पर एक जैसी नहीं होगी। इसलिए किसी भी घटना को देखने से पहले स्थानीय समय, मौसम और दृश्यता की स्थिति की जांच करना जरूरी होगा।



