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एबीवी राव का राजनीतिक पुनर्निर्माण: जगन सरकार से टकराव के बाद विजयवाड़ा मेयर चुनाव

विजयवाड़ा मेयर चुनाव में एक अप्रत्याशित और मजबूत मुकाबला सामने आया है, जहां पूर्व डीजीपी (इंटेलिजेंस) एबी वेंकटेश्वर राव स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। वे years of public service के बाद राजनीति में आए हैं और उन्हें तीन प्रमुख पार्टियों—CPI, CPI(M) और कांग्रेस—का समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने अपने उम्मीदवारों को वापस ले लिया है।

एबीवी राव की पृष्ठभूमि और चुनावी रणनीति

1989 बैच के IPS अधिकारी रहे एबीवी राव जिन्होंने आंध्र प्रदेश में कई महत्वपूर्ण पद संभाले हैं, IIT दिल्‍ली से MTech और Economics में पोस्टग्रेजुएट डिग्री रखते हैं। वे राज्य के इंटेलिजेंस चीफ और कमिश्नर ऑफ प्रिंटिंग एंड स्टेशनरी के रूप में कार्य कर चुके हैं। साथ ही उन्होंने UN की शांति मिशनों में भी हिस्सा लिया और यूएन मेडल प्राप्त किया।

सेवानिवृत्ति के बाद, उन्होंने Centre for Liberty के अध्यक्ष के रूप में काम किया और राजनीतिक क्षेत्र में कदम रखते हुए स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में विजयवाड़ा मेयर पद के लिए दौड़ रहे हैं। उन्होंने पारम्परिक राजनीतिक दलों से खुद को अलग रखते हुए, सीधे जनता से चुनाव लड़ने का विकल्प चुना है।

योजनाएं और राजनीति में बदलाव का इरादा

एबीवी राव ने नगरपालिका प्रशासन में व्यापक सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए अपने अभियान की रूपरेखा बनाई है। उन्होंने भ्रष्टाचार को खत्म करने, कार्यप्रणाली में सुधार और सामाजिक सेवाओं को बेहतर बनाने का वादा किया है। वे धन संग्रह के लिए क्राउडफंडिंग को महत्व देते हैं और जन-आधारित राजनीति पर जोर देते हैं।

उन्होंने मीडिया में कहा कि उनका मकसद राजनीति करना नहीं, बल्कि बेहतर समाज का निर्माण करना है। उनके लिए मेयर का पद जनता से सीधे चुना गया है, जो 2026 में NITI आयोग के शहर प्रशासन मॉडल के अनुसार पहली बार लागू हुआ है।

युवा उम्मीदवार द्वारा लोकोपकारी प्रयासों और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें खास समर्थन मिला है। विश्लेषकों का मानना है कि तीन पार्टियों का समर्थन और उनकी जातीय पृष्ठभूमि चुनाव में विरोधी वोट को प्रभावित कर सकते हैं।

योजनाओं और संघर्षों की कहानी

2014 के बाद एबीवी राव की राजनीति शासन के साथ संघर्षपूर्ण रही है। टीडीपी के कार्यकाल के दौरान उन्होंने राज्य की सरकार के इंटेलिजेंस विभाग का नेतृत्व किया। लेकिन 2019 में जब YSRCP ने सत्ता संभाली, तो उन पर कई आरोप लगाए गए, जिनमें पार्टी विरोधी गतिविधियां शामिल थीं। उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया और कानूनी लड़ाई लड़ी।

2022 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया और एबीवी राव के पक्ष में फैसला सुनाया। उनका निलंबन रद्द हुआ और 2024 में अपनी सेवानिवृत्ति के दिन उन्हें पुनः सेवा में बहाल किया गया। उन्होंने बाद में सेवानिवृत्ति के बाद पद स्वीकार नहीं किया।

राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ना अत्यंत साहसिक कदम है, जो विजयवाड़ा में जनता की आवाज़ बनने की उनकी इच्छा को साबित करता है। حزب सियासत के पार जाकर वे विकास और प्रशासन में सुधार का संदेश दे रहे हैं।

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