फेस रिकग्निशन समस्या के कारण 379 आदिवासी बच्चों को ICDS लाभ से वंचित

अट्टपादि में 379 आदिवासी बच्चों को अधूरी फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) पंजीकरण के कारण एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) लाभ से वंचित किए जाने की जानकारी सामने आई है। आदिवासी संगठन थम्पू ने इस मामले की जाँच कराने की मांग की है।
आदिवासी बच्चों को ICDS लाभ से वंचित करने का मामला
थम्पू के अनुसार, ये बच्चे 192 आदिवासी बस्तियों में फैले हुए हैं, जिन्हें लाभ सूची से बाहर रखा गया क्योंकि उनके मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं थे। संगठन ने तकनीकी सहायता मुहैया कराने और बच्चों को ICDS सेवाएं जारी रखने के लिए कदम उठाने की मांग की है।
यह मुद्दा 5 अक्टूबर को अट्टपादी में SC/ST और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री के.ए. तुलसी से मुलाकात के दौरान उठाया गया। थम्पू ने अधिकारियों के समन्वय समिति के पुनर्जीवन का स्वागत किया, जो क्षेत्र में कुछ बच्चों की मौत के बाद बनाई गई थी।
आदिवासी अधिकार और जरूरी मांगें
थम्पू के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि समिति और नोडल कार्यालय थम्पू और अन्य आदिवासी समूहों के प्रयासों से स्थापित किए गए थे। उन्होंने आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों को समिति में शामिल करने का भी अनुरोध किया।
संगठन ने वनों के अधिकार अधिनियम के तहत 2025-26 में दिए गए 586 आवेदन पर जल्द निर्णय लेने और व्यक्तिगत वन अधिकार, सामुदायिक वन अधिकार तथा सामुदायिक अधिकार दस्तावेजों का समय पर वितरण सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही, अट्टपादी में साफ पीने के पानी की सुविधा और आदिवासी बच्चों की मौत के मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई की भी आवश्यकता जताई गई।
थम्पू ने निशाने पर रखे अन्य मुद्दों में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित लोगों के लिए मासिक पोषण किट और पेंशन, जननी जन्म रक्षा योजना के तहत समय पर सहायता, और Tribal Plus योजना के तहत रोजगार दिवसों को 150 तक बढ़ाने की माँग की गई है। प्रसाद ने कहा कि आदिवासी समुदाय के पास सीमित आजीविका विकल्प हैं, इसलिए रोजगार योजनाओं तक उनकी बेहतर पहुँच जरूरी है।
थम्पू के संयोजक के.ए. रामु, बिनिल कुमार थरायल, रेवथी उदयकुमार, मंजू पत्तिमाला, सुजा गोंचियूर और परमेश्वरन वेल्लमारी भी इस बैठक में मौजूद थे।




