भारत-अमेरिका व्यापार समझौता होगा बिल्कुल अलग: डोनाल्ड ट्रम्प

संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौता जल्द ही होने वाला है, जो पिछले समझौतों से बहुत अलग होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 20 अक्टूबर 2026 को वॉशिंगटन के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह जानकारी दी। यह दो देशों के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक मोड़ साबित हो सकता है।
व्यापार समझौते की प्रगति और महत्व
डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका और भारत इस नई व्यापार डील को लेकर “काफी करीब” हैं, और यह पिछले सहयोगों से काफी भिन्न होगा। दोनों पक्ष इस समझौते के शीघ्र समापन के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार नियमों में कई बदलाव लेकर आ सकता है।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी इस मसले पर कहते हुए बताया कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हो रही बातचीत की प्रगति का स्वागत किया है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इस पर सहमति बन जाएगी, जिससे व्यापार और आर्थिक रिश्ते और मजबूत होंगे।
आगे की योजनाएं और बातचीत
इस संदर्भ में, अमेरिकी विदेश मंत्री मारको रुबियो भारत का दौरा कर रहे हैं और वहां व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और जन-जन से जुड़ी गतिविधियों पर चर्चा कर रहे हैं। रुबियो ने भी इस नई डील के करीब होने की बात कही और भारत से अमेरिकी ऊर्जा और रक्षा खरीद को बढ़ाने का आग्रह किया।
इस महीने के शुरुआत में, भारत के वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल ने मिल्वौकी और वॉशिंगटन में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेम्सन ग्रीयर से मुलाकात की थी, जिसमें इस समझौते के तकनीकी पहलुओं पर चर्चा हुई। फरवरी में दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए रूपरेखा को अंतिम रूप दिया था।
हालांकि, अमेरिका में टैरिफ नियमों में बदलाव के कारण नई बातचीत की आवश्यकता पड़ी है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि दोनों देशों के हितों का सही प्रतिनिधित्व हो, बातचीत जारी है। यह परिवर्तन अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच के लिए निर्णायक हो सकता है।
ट्रम्प ने जोर देते हुए कहा, “वे एक समझौता करना चाहते हैं और हम एक समझौता करने जा रहे हैं।” यह स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका भारत के साथ बेहतर आर्थिक सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक और राजनीतिक संबंधों में मजबूती लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके प्रभाव से क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर व्यापार संबंधों में बढ़ोतरी की उम्मीद है। दोनों देश इस मामले को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए हुए हैं।




