इराक से गाजा तक: लंबे समय तक चला विनाश का सिलसिला

अमेरिकी सैनिकों ने 30 सितंबर, 2026 को इराक से आधिकारिक रूप से वापसी की, जो मार्च 2003 में हुए आक्रमण के 23 साल बाद हुआ। उस आक्रमण का कारण बताया गया था कि सद्दाम हुसैन के शासन के पास हथियारों का भंडार था और इसने आतंकवादी समूहों को आश्रय दिया। बाद में यह दावा झूठ साबित हुआ जबकि अल-कायदा ने इराक में हिंसक शाखा स्थापित कर ली।
अमेरिका की विफल नीतियां
इराक पर आक्रमण को 21वीं सदी का एक सबसे गंभीर रणनीतिक और मानवीय संकट कहा गया है। अमेरिकी सेना का वहां से जाना उस वक्त हो रहा है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ एक बड़ी क्षेत्रीय लड़ाई लड़ रहा है। यह घटनाक्रम उस विफलताओं की गवाही है जिसने पश्चिम एशिया को अस्थिर किया और वहां विभिन्न आतंकवादी व मिलिशिया समूहों को बढावा दिया।
इराक में अमेरिकी मिशन्स अपने मकसद में सफल नहीं रहे। अफगानिस्तान के बाद औरो दो दशक के युद्ध में अमेरिका को अपने मकसदों में विफलता मिली। आज इराक एक युद्धग्रस्त और कमजोर सरकार के नियंत्रण में है, जबकि ईरान समर्थित मिलिशिया सक्रिय हैं। इस लड़ाई में अमेरिका ने लगभग 1.7 ट्रिलियन डॉलर खर्च किए और 4,500 सैनिक गंवाए, वहीं हजारों इराकी नागरिक मारे गए।
गाजा में तीन साल बाद हालात
अक्टूबर 2023 में हमास के आक्रामक हमले के बाद से गाजा में युद्ध जारी है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार फ़िलिस्तीनी मृतकों की संख्या 74,000 से अधिक हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, युद्ध में 64,000 से अधिक बच्चे मारे गए या घायल हुए हैं।
हालांकि 2025 में युद्ध विराम समझौता हुआ था, इसके बावजूद भी फिलहाल संघर्ष जारी है। यूनिसेफ का कहना है कि युद्ध विराम के बाद भी लगभग हर दिन एक बच्चा मारा जा रहा है। गाजा सिटी में स्थायी रूप से हजारों लोग खुले जगहों पर झोपड़ियाँ बनाकर रह रहे हैं, जिससे वहां का जीवन असहनीय हो गया है।
इजरायल की इस कार्रवाई को कई विशेषज्ञ नृशंसता और जनसंहार के रूप में देखते हैं। वहीं, हाल में ब्रिटेन में 94 वर्षीय मानवाधिकार कार्यकर्ता मार्गरेट ओवेन के गिरफ्तारी की खबरें आईं, जो गाजा की मदद के लिए आवाज उठा रही थीं। यह संकेत हैं कि इस मामले पर वैश्विक प्रतिक्रिया में बदलाव हो रहा है।
ब्रिटेन में ही ग्रीन पार्टी ने सायोनिज़्म को नस्लवाद की एक रूपरेखा के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव पास किया है। ब्रिटेन के विदेश मंत्री एडवर्ड मिलिबैंड ने भी यह कहा है कि प्रॉ-फ़िलिस्तीनी आवाज़ को अब सुना जा रहा है। यह घोर संघर्ष के बीच एक नई उम्मीद दर्शाता है।
अमेरिका और उसके सहयोगी क्षेत्रीय संघर्षों में उलझे हुए हैं, जिसकी वजह से पश्चिम एशिया खतरों से भरा रहता है। इराक और गाजा की वर्तमान परिस्थितियाँ इस क्षेत्र की अस्थिरता और मानवीय संकट को दर्शाती हैं, जिन्हें हल करने की वैश्विक जरूरत बनी हुई है।




