अंतर्राष्ट्रीय

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला वैक्सीन का परीक्षण शुरू

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस के खिलाफ वैक्सीन के नए क्लीनिकल परीक्षण की शुरुआत हो गई है। यह प्रयास इस बीमारी के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए WHO द्वारा समर्थन प्राप्त है। 23 अक्टूबर को इटुरी प्रांत के बुनिया शहर में टीकाकरण का पहला डोज दिया गया।

ट्यूमाइनी वैक्सीन और परीक्षण प्रक्रिया

इस वैक्सीन परीक्षण को ट्यूमाइनी नाम दिया गया है, जिसका अर्थ स्वाहिली भाषा में ‘आशा’ होता है। इसमें Ervebo वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पहले ज़ायर स्ट्रेन के खिलाफ मान्य है। परीक्षण का उद्देश्य यह देखना है कि क्या यह वैक्सीन Bundibugyo स्ट्रेन के खिलाफ भी असरदार है या नहीं।

टेस्ट में उच्च जोखिम वाले लोगों को रिंग वैक्सीनेशन के तहत टीका दिया जाएगा। इस विधि में संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों को प्राथमिकता दी जाती है। इस परीक्षण में गर्भवती महिलाओं और 12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को भी शामिल किया जाएगा, जो आम तौर पर परीक्षण से बाहर रहते हैं।

DRC की गंभीर स्थिति और आगामी प्रयास

DRC में इस वर्ष की सबसे बड़ी इबोला महामारी ने 9,700 से ज्यादा मामलों के साथ 4,600 से अधिक मौतें दर्ज की हैं। Bundibugyo स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई मंजूर उपचार या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेबरेयेसस ने इस परीक्षण को ‘वैज्ञानिक आशा’ कहा है।

अभी Bundibugyo के खिलाफ दो वैक्सीन क्लीनिकल परीक्षण के प्रारंभिक चरण में हैं—ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ChAdOx1 और अमेरिकी फार्मा कंपनी Moderna की mRNA आधारित वैक्सीन। ये दोनों जल्द ही ट्यूमाइनी परीक्षण में शामिल की जाएंगी।

Coalition for Epidemic Preparedness Innovations (CEPI) ने इन वैक्सीन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी है। CEPI का कहना है कि इस परीक्षण से महामारी को कम करने और भविष्य की तैयारियों के लिए अहम जानकारी मिलेगी।

संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ इबोला समन्वयक जुलियन हार्नाइस ने बताया कि संक्रमण केंद्र बनाने और वायरस से लड़ने के प्रयासों में वित्तीय और कर्मचारी सहायता की कमी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि सफल परीक्षण से Bundibugyo वायरस के खिलाफ प्रभावी वैक्सीन विकसित करने में मदद मिलेगी।

DRC ने इस वर्ष 15 मई को अपना 17वां इबोला प्रकोप घोषित किया था। WHO ने दो दिन बाद इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया। इस कदम से वैश्विक स्तर पर इस गंभीर स्थिति पर ध्यान केंद्रित हुआ।

इस परीक्षण और अन्य प्रयासों से उम्मीद है कि इबोला महामारी पर काबू पाने में मदद मिलेगी और प्रभावित समुदायों की जान बचाने में सफलता मिलेगी। स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, WHO और अन्य सहयोगी इस काम में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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