विश्व में बदलाव का दौर आने वाला है, चुनौतियों का सामना करेंगे: जयशंकर

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि वर्तमान समय विश्व के लिए बदलावों का दौर होगा, जिसमें कई संघर्ष और टैरिफ में उतार-चढ़ाव के कारण स्थितियां अस्थिर होंगी। उन्होंने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मलेन में इस बात पर ज़ोर दिया कि इन चुनौतियों का सामना करना हमारा मुख्य काम है।
विश्व की अस्थिर परिस्थितियां और चुनौतियां
जयशंकर ने बताया कि आज का युग एक ‘अस्थिर और उलझन भरा’ समय है, जहां कई युद्ध और राजनैतिक तनाव मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार में भी गैर-बाज़ार कारकों और टैरिफ में उतार-चढ़ाव जैसे दबाव बढ़ रहे हैं, जिनसे आर्थिक परिदृश्य प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा, “हम दो मुख्य संघर्ष देख रहे हैं तथा अन्य अनेक विवाद भी जारी हैं, जो विश्व को ‘उलझी हुई जलभूमि’ में डाल रहे हैं।”
भारत की तैयारी और प्रतिक्रिया
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा अपनी समस्याओं का सामना किया है, चाहे कोविड महामारी की चुनौती हो या आज के अनेक संघर्षों का दबाव। उन्होंने ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक संकट जैसी समस्याओं को भी शीघ्रता से समझकर उससे निपटने की आवश्यकता पर बल दिया।
जयशंकर ने यह भी जताया कि भारत इन जटिल परिस्थितियों का मुकाबला करने में पूरी तरह सक्षम है और देश इस चुनौती को पार कर लेगा। “मुझे पूरा विश्वास है कि हम इन चुनौतियों का सामना कर सफल होंगे,” उन्होंने कहा।
उन्होंने संबोधित किया कि यह समय नई सोच और योजनाओं का है, जो बदलती दुनिया के अनुकूल हों। भारतीय नीति निर्धारकों के लिए यह आवश्यक है कि वे आगे बढ़कर रणनीतियां बनाएं और उनका जीता जागता क्रियान्वयन करें।
जयशंकर ने इस अवसर पर ग्लोबल साउथ के मुद्दों को भी उठाया और बताया कि विश्व के इस हिस्से की उम्मीदें भारत से हैं कि वह वैश्विक मंच पर उनकी आवाज़ बुलंद करेगा।
इस संदर्भ में उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का मार्ग सबसे उपयुक्त बताया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के सुधार पर भी अपनी बात रखी और कहा कि दुनिया के कुछ बड़े देश इसके सुधारों का विरोध कर रहे हैं, जो इस संस्था को गतिरोध की स्थिति में ले जाते हैं।
सम्मेलन के अंतिम सत्र में सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री जॉर्ज योंग बून यो के साथ जयशंकर ने वैश्विक राजनैतिक और आर्थिक स्थिति पर विचार विमर्श किया और आने वाले समय में स्थिरता के लिए कई सुझाव प्रस्तुत किए। यह कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन तीन दिनों का था और इसका मुख्य विषय था ‘अस्थिरता के युग में लचीलापन’।




