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हॉर्मोनल से लेकर जेनेटिक टेस्टिंग तक, अगर आप भी कर रहे हैं IVF की प्लानिंग; तो जरूर करा लें 5 टेस्ट

आज मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है कि इनफर्टिलिटी का इलाज अब पहले से कहीं ज्यादा सटीक और पर्सनलाइज्ड हो गया है। जी हां, IVF तकनीक में लगातार हो रहे बदलावों ने निसंतान दंपतियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है। आइए, जानते हैं ऐसे समय पर कौन-से मेडिकल टेक्स्ट्स कराना बेहद फायदेमंद होता है

HighLights

  1. 2026 में IVF टेस्टिंग ज्यादा पर्सनलाइज्ड हो गई है
  2. इससे गर्भधारण की सफलता दर में सुधार हुआ है
  3. ऐसे में, संक्रामक रोगों की स्क्रीनिंग भी जरूरी होती है

 IVF की तकनीक लगातार और तेजी से बदल रही है। साल 2026 में, फर्टिलिटी टेस्टिंग पहले से कहीं अधिक सटीक, व्यक्तिगत और तकनीकी रूप से उन्नत हो गई है। आज के दौर में IVF टेस्ट्स बांझपन के संभावित कारणों का पता लगाने का एक प्रमुख तरीका बन गए हैं।

चाहे कोई मरीज अपनी फर्टिलिटी जर्नी शुरू करने वाला हो या IVF के अगले राउंड की तैयारी कर रहा हो, 2026 में हर कपल को इन मॉडर्न रिकमेंडेशन्स की जानकारी होना बेहद जरूरी है, क्योंकि सही सलाह न केवल गर्भधारण की सफलता दर को बढ़ा सकती है, बल्कि इमोशनल और फाइनेंशियल स्ट्रेस को कम करने में भी मदद करती है। आइए, डॉ. पुनीत राणा अरोड़ा से उन जरूरी मेडिकल टेस्ट्स के बारे में जानते हैं, जिन्हें आजकल डॉक्टर अक्सर कराने की सलाह देते हैं।

Pre IVF testing checklist

(Image Source: AI-Generated)

हार्मोनल टेस्ट

IVF के इवैल्यूएशन में हार्मोनल टेस्ट अभी भी सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। इसमें नीचे दिए गए टेस्ट शामिल होते हैं:

  • AMH टेस्ट: यह ब्लड सैंपल ओवेरियन रिजर्व (अंडाशय में अंडों की बची हुई संख्या) को दर्शाती है।
  • FSH और LH: ये टेस्ट ओवेरियन फंक्शन्स का आकलन करने के लिए किए जाते हैं।
  • थायराइड और प्रोलैक्टिन: इन हार्मोन्स के स्तर की जांच नियमित रूप से की जाती है, क्योंकि इनका असामान्य स्राव ओव्यूलेशन (अंडा बनने की प्रक्रिया), इम्प्लांटेशन और गर्भावस्था के परिणामों में बाधा डाल सकता है।

अल्ट्रासाउंड और इमेजिंग टेस्ट

यूट्रस और ओवरी की कंडीशन को समझने के लिए ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है। यह टेस्ट एंट्रल फॉलिकल काउंट का आकलन करने और यूट्रस में फाइब्रॉएड  जैसी समस्याओं का डायग्नोज करने में मदद करता है।

कुछ खास मामलों में, एम्ब्रियो ट्रांसफर से पहले यूटेराइन कैविटी को बेहतर ढंग से देखने के लिए 3D अल्ट्रासाउंड या सोनोहिस्टेरोग्राफी जैसी उन्नत तकनीकों की सिफारिश की जा सकती है।

Essential testes for IVF

(Image Source: Freepik)

जेनेटिक और क्रोमोसोमल टेस्टिंग

साल 2026 तक PGT (प्री-इम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग) काफी उन्नत हो चुकी है और इसका इस्तेमाल अब ज्यादा नॉर्मल हो गया है।

  • PGT-A टेस्टिंग: एम्ब्रो की PGT-A जांच इम्प्लांटेशन की दर को सुधारने और मिसकैरेज के रिस्क को कम करने में मदद कर सकती है।
  • कैरियर स्क्रीनिंग: IVF शुरू करने से पहले दोनों पार्टनर्स के लिए वंशानुगत आनुवंशिक स्थितियों की जांच की सलाह दी जाती है।

मेल फर्टिलिटी टेस्टिंग

IVF टेस्टिंग केवल महिलाओं तक ही सीमित नहीं है। पुरुषों के लिए सीमन एनालिसिस अभी भी जरूरी है, जिससे स्पर्म काउंट, उनकी गतिशीलता और बनावट का पता चलता है।

खास तौर पर जब बार-बार IVF फेल हो रहा हो या बांझपन का कारण स्पष्ट न हो, तो ‘स्पर्म डीएनए फ्रेगमेंटेशन’ की जांच करने वाले एडवांस्ड टेस्ट्स की सलाह तेजी से दी जा रही है।

जरूरी हैं ये मेडिकल टेस्ट

इलाज को सुरक्षित बनाने के लिए कुछ जरूरी नियमों का पालन किया जाता है। इसमें सबसे पहले एचआईवी (HIV), हेपेटाइटिस और सिफलिस जैसे इन्फेक्शन्स की जांच की जाती है।

इसके साथ ही, ब्लड शुगर, विटामिन-डी और आपकी सामान्य सेहत का भी टेस्ट किया जाता है। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि आपकी अच्छी सेहत का सीधा असर IVF की सफलता पर पड़ता है।

साल 2026 में IVF टेस्टिंग पहले से काफी बेहतर और पर्सनलाइज्ड हो गई है। इन मॉडर्न टेस्ट्स की मदद से फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स आपके लिए इलाज का एकदम सही तरीका तय कर पाते हैं। इससे न सिर्फ सक्सेस के चांस बढ़ते हैं, बल्कि पूरा इलाज सुरक्षित भी रहता है। आसान शब्दों में कहें तो, सही समय पर सही टेस्ट कराना आपकी सफल IVF जर्नी की तरफ एक बहुत बड़ा कदम है।

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