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राजस्व की खुली लूट: बिना ISTP यूपी में खप रही MP–छत्तीसगढ़ की बालू-गिट्टी

सीमावर्ती इलाकों में अवैध परिवहन का खेल, हर महीने करोड़ों के नुकसान का अनुमान

सब तक एक्सप्रेस।
सिंगरौली/सोनभद्र सीमा क्षेत्र में इन दिनों अवैध खनन सामग्री परिवहन और राजस्व चोरी का बड़ा खेल सामने आ रहा है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से बालू व गिट्टी लेकर आने वाले सैकड़ों वाहन बिना इंटर-स्टेट ट्रांसपोर्ट परमिट (ISTP) के उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे राज्य सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार एनटीपीसी रिहंद और शक्तिनगर क्षेत्र की विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं में निर्माण कार्य के लिए प्रतिदिन हजारों घन मीटर बालू और गिट्टी की खपत हो रही है। यह सामग्री पड़ोसी राज्यों से लाई जा रही है, जबकि नियमानुसार अंतरराज्यीय परिवहन पर प्रति घन मीटर करीब 150 रुपये का ISTP शुल्क देना अनिवार्य है।
बिना परमिट सीमा पार, मिलीभगत के आरोप
जानकारी के मुताबिक अधिकांश वाहन बिना ISTP कटवाए ही सीमा पार कर रहे हैं। आरोप है कि वन विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों की मिलीभगत से इन वाहनों को बेरोकटोक प्रवेश मिल रहा है।
हैरानी की बात यह है कि औद्योगिक परियोजनाओं के प्रवेश द्वारों पर वाहनों के दस्तावेज तो जांचे जाते हैं, लेकिन जानबूझकर ISTP की जांच नहीं की जाती। इससे परियोजना प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
करोड़ों का नुकसान, बड़े सिंडिकेट की आशंका
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ईमानदारी से जांच कराई जाए तो एक बड़े अवैध सिंडिकेट का खुलासा हो सकता है, जिसमें ठेकेदारों के साथ-साथ कई विभागों के प्रभावशाली लोग भी शामिल हो सकते हैं।
प्रतिदिन हजारों घन मीटर सामग्री बिना टैक्स और परमिट के खपाई जा रही है, जिससे 150 रुपये प्रति घन मीटर के हिसाब से सरकार को हर दिन लाखों और हर महीने करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
सवालों के घेरे में प्रशासन
● क्या सीमावर्ती चेकपोस्टों पर निगरानी ।                  जानबूझकर ढीली रखी जा रही है?
● परियोजना प्रबंधन ISTP की अनदेखी क्यों कर रहा है?
● आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है?
अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर मामले पर ठोस जांच कर कार्रवाई करता है या फिर राजस्व की यह लूट यूं ही जारी रहती है।
सब तक एक्सप्रेस

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