सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा- जजों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने पर करें विचार, 17 सितंबर को अगली सुनवाई

नई दिल्ली, भारत
न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम टिप्पणी की। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने को कहा। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारी सामान्य सरकारी कर्मचारियों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक उम्र में न्यायिक सेवा में आते हैं। ऐसे में उनकी सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से राज्यों पर असामान्य वित्तीय बोझ पड़ने की दलील स्वीकार नहीं की जा सकती।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। पीठ में जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने उन राज्यों के एडवोकेट जनरल से कहा, जो इस प्रस्ताव को लेकर अभी पूरी तरह सहमत नहीं हैं, कि वे अपने मुख्यमंत्रियों से बातचीत करें और उन्हें प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाने के लिए मनाने का प्रयास करें।
वित्तीय बोझ की दलील पर कोर्ट की टिप्पणी
कुछ राज्यों ने न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 या 60 वर्ष रखने की बात कही थी। राज्यों का तर्क था कि सरकारी कर्मचारियों की मौजूदा सेवानिवृत्ति व्यवस्था से अलग न्यायिक अधिकारियों के लिए अधिक आयु सीमा तय करने से वित्तीय भार बढ़ सकता है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक सेवा में प्रवेश के समय जज पहले ही काफी उम्र पार कर चुके होते हैं। इसलिए उन्हें 62 वर्ष तक सेवा में बनाए रखने से राज्यों पर ऐसा अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा, जिसे प्रस्ताव का विरोध करने का आधार बनाया जाए।
यूपी और उत्तराखंड ने बताई वित्तीय परेशानी
सुनवाई में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड ने न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के प्रस्ताव को लागू करने में वित्तीय कठिनाइयों का उल्लेख किया। वहीं नगालैंड ने कहा कि उसके यहां सामान्य सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष है। इसलिए न्यायिक अधिकारियों की आयु सीमा बढ़ाने पर प्रशासनिक और वित्तीय समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
दूसरी ओर मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना ने जिला अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन किया।
17 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
राज्यों की अलग-अलग राय सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने को कहा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तारीख तय की है। अब राज्यों के रुख और एडवोकेट जनरल की मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बातचीत पर अगली सुनवाई में चर्चा हो सकती है।



