उत्तर प्रदेशटॉप न्यूजदिल्लीबड़ी खबरराज्यराष्ट्रीयलखनऊसीतापुरसोनभद्र

वाराणसी–शक्तिनगर मार्ग: विकास के नाम पर टोल वसूली, अधूरा हाईवे बना ‘वसूली कॉरिडोर’-लोकेश उपाध्याय

120 किमी में ₹440 टोल, सुविधाएँ शून्य—मानकों के बिना जारी वसूली पर उठे गंभीर सवाल

सोनभद्र ब्यूरो | सतीश पाण्डेय
वाराणसी–शक्तिनगर राष्ट्रीय मार्ग इन दिनों विकास से ज्यादा टोल वसूली को लेकर चर्चा में है। जिस मार्ग का निर्माण चेतक कंपनी द्वारा कराया गया, वही सड़क चार राज्यों को छूती है और भारत की सबसे महंगी सड़कों में गिनी जा रही है। हैरानी की बात यह है कि महज 120 किलोमीटर के सफर में यात्रियों को लगभग ₹440 टोल टैक्स चुकाना पड़ता है, जबकि सड़क का निर्माण आज तक पूर्ण नहीं हो पाया है।
सरकारी मानकों के अनुसार किसी भी हाईवे पर टोल वसूली से पहले सड़क का कार्य पूर्ण होना, सेफ्टी ऑडिट कराना, रेस्ट एरिया, गेस्ट हाउस, शौचालय, पार्किंग, स्पष्ट साइनेज और ब्रेकर से पहले चेतावनी व्यवस्था अनिवार्य होती है। लेकिन वाराणसी–शक्तिनगर मार्ग पर इन बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। न यात्रियों के रुकने की समुचित व्यवस्था है, न शौचालय, न ही सुरक्षा से जुड़े संकेतक और चेतावनियाँ।
इसके बावजूद चार-चार टोल प्लाज़ा पूरी मुस्तैदी से संचालित हो रहे हैं और वर्ष 2014 से लगातार टोल वसूली की जा रही है। ACP कंपनी के पास यात्रियों की सुविधा के नाम पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है, लेकिन सरकार और सिस्टम इस पूरे मामले पर आंख मूंदे हुए नजर आ रहे हैं। सवाल यह है कि जब सड़क अधूरी है और मानक पूरे नहीं हुए हैं, तो टोल वसूली आखिर किस आधार पर और कितनी कानूनी है?
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह मार्ग अब सड़क कम और जनता से वसूली का एक्सप्रेस कॉरिडोर अधिक बन चुका है। सोनभद्र जिले के वाहन चालकों पर इसका सीधा आर्थिक बोझ पड़ रहा है, जबकि उन्हें बदले में कोई सुविधा नहीं मिल रही।
मांगें साफ और सीधी हैं—
जब तक हाईवे मानक के अनुसार पूरी तरह पूर्ण न हो, तब तक टोल वसूली तत्काल बंद की जाए।
सोनभद्र जिले की प्राइवेट गाड़ियों को टोल-मुक्त किया जाए।
यात्रियों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ।
जनता का कहना है कि अगर विकास के नाम पर सिर्फ टोल बढ़े और सुविधाएँ शून्य रहें, तो उसे विकास नहीं बल्कि व्यवस्थित लूट ही कहा जाएगा। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक चुप्पी साधे रहता है और आम जनता को राहत कब मिलती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please enter comment in Japanese. (Anti-spam)

Back to top button
error: Content is protected !!