ट्रम्प ने वैश्विक टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने का निर्णय लिया है, ‘तुरंत प्रभावी’।

### दिल्ली में प्रदूषण का नया संकट: हवा की गुणवत्ता में गिरावट
दिल्ली में एक बार फिर से प्रदूषण ने विकराल रूप ले लिया है, जिससे नागरिकों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हाल के दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ने खतरनाक स्तर को पार कर लिया है, जिसने शहरवासियों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। यह स्थिति न केवल श्वसन समस्याओं को बढ़ा रही है, बल्कि सामान्य जीवन को भी प्रभावित कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रदूषण के प्रमुख कारणों में बढ़ती निर्माण गतिविधियाँ, वाहनों की संख्या में वृद्धि और मौसम की स्थिति शामिल हैं। सर्दियों के आते ही तापमान में गिरावट और हवा की दिशा में बदलाव ने धूल और अन्य प्रदूषकों के जमाव को बढ़ा दिया है। इसके परिणामस्वरूप, कई इलाकों में AQI 400 के पार चला गया है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में प्रदूषण के प्रभाव को महसूस किया जा रहा है। कई लोग सांस लेने में दिक्कत की शिकायत कर रहे हैं, वहीं अस्पतालों में भी सांस संबंधी बीमारियों के मामलों में इजाफा हुआ है। इस स्थिति को देखते हुए, स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे घर के भीतर रहें और विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को बाहर निकलने से बचने के लिए कहा गया है।
सरकारी अधिकारियों ने इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा है कि निर्माण कार्यों और वाहनों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए ठोस नीतियों पर विचार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, शहरी परिवहन प्रणाली में सुधार लाने के लिए भी योजनाएँ बनाई जा रही हैं।
हालांकि, नागरिकों का मानना है कि सरकार को इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए अधिक सक्रियता दिखाई देनी चाहिए। कई स्थानीय निवासी प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए व्यक्तिगत प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं, जैसे कि कारpooling और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग।
दिल्ली की यह प्रदूषण समस्या केवल स्थानीय नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय चिंता बनती जा रही है। अगर समय पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह स्थिति भविष्य में और भी गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए, सभी stakeholders को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा, ताकि दिल्ली की हवा को फिर से साफ और स्वच्छ बनाया जा सके।



