विदेशी व्यापार नीति के तहत स्वर्ण और चांदी आयात करने वाले अधिकृत बैंकों की सूची में केंद्र ने अपडेट किया

नई दिल्ली, भारत
विदेशी व्यापार नीति, 2023 के अंतर्गत सोने और चांदी के आयात के लिए अधिकृत बैंकों की सूची में संशोधन किया गया है। वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से जारी निदेशकate जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) की अधिसूचना के अनुसार, आर्थिक प्रक्रियाओं को और पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए Appendix 4B में आवश्यक बदलाव किए गए हैं।
DGFT ने अपने नोटिफिकेशन में बताया कि ये संशोधन हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर्स, 2023 के Appendix 4B में लागू होंगे, जो कि विदेशी व्यापार नीति, 2023 का एक प्रमुख हिस्सा है। इस तालिका में जिन बैंकों को स्वर्ण और चांदी के आयात के लिए अधिकृत किया गया है उनकी सूची को अद्यतन किया गया है ताकि वे आज के वर्तमान व्यापारिक परिदृश्य के अनुरूप कार्य कर सकें।
इस पहल का उद्देश्य आयात प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाना तथा देश में सोने और चांदी के व्यापार को नियंत्रित करना है। यह कदम व्यापारिक गतिविधियों में पारदर्शिता लाने और सट्टागिरी रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। साथ ही, इससे विदेशी मुद्रा नियंत्रण भी बेहतर होगा, जिससे आर्थिक स्थिरता को बल मिलेगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, DGFT ने बताया कि संशोधन के जरिए उन बैंकों का विस्तार या पुनः समीक्षा की गई है, जो स्वर्ण और चांदी के आयात में शामिल हैं। यह कदम व्यापार एवं आयात मानकों को पूर्णतः अनुपालन में रखने के लिए आवश्यक था। इसके साथ ही, यह नीति राज्य और केंद्र सरकार के नियमों के साथ तालमेल बिठाने में सहायक सिद्ध होगी।
विशेषज्ञों ने इस अपडेट का स्वागत किया है और इसे भारत के स्वर्ण और चांदी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। उनका मानना है कि सरकारी स्तर पर ऐसे स्पष्ट निर्देश और नियम आने से अवैध व्यापार पर लगाम लगेगी और बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी।
DGFT के इस आदेश का प्रभाव व्यापारियों, आयातकों और वित्तीय संस्थानों पर पड़ेगा, जिन्हें नई सूची के अनुसार अपने व्यापारिक दस्तावेजों और प्रक्रियाओं को अपडेट करना होगा। इस बदलाव से व्यापारिक प्रक्रिया को सरल बनाने का भी लक्ष्य है, जिससे आयातकों को बेहतर सेवाएं मिल सकें।
इस अधिसूचना से जुड़ी पूरी जानकारी DGFT की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है, जिसमें संबंधित दस्तावेज और संशोधित तालिकाएं शामिल हैं। व्यापारिक प्रतिष्ठानों और बैंकों को सलाह दी गई है कि वे इस महत्त्वपूर्ण बदलाव को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाएं।
सरकार ने भी अपने बयान में कहा है कि विदेशी व्यापार नीति को गतिशील बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसे अपडेट आवश्यक होते हैं, ताकि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कायम रखी जा सके। आने वाले समय में भी ऐसे सुधार जारी रहेंगे, जिससे भारत के व्यापारिक ढांचे को मजबूत बनाया जा सके।



