MIT-बेंगलुरु ने CMTI सुविधा का लाभ उठाकर भविष्य के सेमीकंडक्टर टैलेंट पाइपलाइन का निर्माण किया

बेंगलुरु, कर्नाटक | 27 अप्रैल 2024
एमआईटी-बेंगलुरु के अंडरग्रेजुएट छात्रों के लिए एक अद्वितीय और नवीन कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिसने उन्हें भारत में आमतौर पर अंडरग्रेजुएट स्तर पर उपलब्ध नहीं होने वाली सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान किया है। इस पहल को सेमीकंडक्टर मैनुफैक्चरिंग टेक्नोलॉजीज इंस्टीट्यूट (CMTI), बेंगलुरु के विश्वसनीय सुविधाओं के माध्यम से संचालित किया गया है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भविष्य के फ्रंट-लाइन टैलेंट का निर्माण करना है, विशेष रूप से युवा छात्रों को आधुनिक तकनीकी प्रक्रियाओं से अवगत कराना ताकि वे इस अत्यंत प्रतिस्पर्धी और तेजी से विकसित हो रहे उद्योग में सफल हो सकें। एमआईटी-बेंगलुरु के छात्र इस अवसर का उपयोग करते हुए विभिन्न फैब्रिकेशन तकनीकों और उपकरणों के वास्तविक उपयोग को समझने में सक्षम हुए हैं, जो प्रारंभिक स्तर पर छात्रों के लिए सामान्यतः अप्राप्य होती हैं।
सेमीकंडक्टर उद्योग भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, और तकनीकी विकास के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इस पहल के माध्यम से न केवल छात्रों को श्रमशक्ति के रूप में तैयार किया जा रहा है बल्कि यह भारत की सेमीकंडक्टर समृद्धि में भी सहायक होगी। CMTI की इस सहभागिता से छात्रों को चिप डिजाइन, वॅफर प्रोसैसिंग, पैकेजिंग और परीक्षण सहित विभिन्न सेमीकंडक्टर निर्माण के चरणों को नजदीक से जानने की सुविधा मिलती है।
एमआईटी-बेंगलुरु के प्रोग्राम निदेशक ने बताया कि यह प्रशिक्षण छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव साबित होगा, जो उन्हें न केवल तकनीकी कौशल सिखाएगा बल्कि वास्तविक उद्योग की मांगों को भी समझने में मदद करेगा। इससे आने वाले वर्षों में भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
इस कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन से उम्मीद की जा रही है कि देश में अन्य शैक्षिक संस्थान भी अपने पाठ्यक्रमों में इस तरह के व्यावहारिक तत्वों को शामिल करेंगे, जिससे टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में दक्ष मानव संसाधन की कमी को पूरा किया जा सकेगा। इस पहल को उद्योग विशेषज्ञों और शैक्षणिक समुदाय ने व्यापक सराहना दी है।
इस प्रकार, MIT-बेंगलुरु और CMTI के बीच यह सहयोग सेमीकंडक्टर तकनीक के क्षेत्र में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



