कलेक्टर की अध्यक्षता में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए विशेष प्रकोष्ठ का गठन
जिले में एक वर्ष तक करेगा निगरानी और क्रियान्वयन का कार्य

ब्यूरो चीफ उमरिया : राहुल शीतलानी
उमरिया। जिले में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा-5 के तहत निर्धारित प्रावधानों के पालन के लिए कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय की अध्यक्षता में विशेष प्रकोष्ठ (स्पेशल सेल) का गठन किया गया है। यह विशेष प्रकोष्ठ आगामी एक वर्ष तक जिले में निगरानी, संचालन और विभिन्न व्यवस्थाओं के क्रियान्वयन का कार्य करेगा।
नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में करेगा कार्य
गठित समिति उमरिया जिले के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत कार्य करेगी। समिति में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अभय सिंह को सदस्य सचिव एवं समन्वयक बनाया गया है। इसके अलावा मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग, कृषि विभाग, श्रम विभाग, उद्योग विभाग, जल संसाधन, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा, नगरीय प्रशासन विभाग, जनपद पंचायतों, नगरपालिकाओं और स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े अधिकारियों को सदस्य बनाया गया है।
डंपिंग स्थलों का होगा निरीक्षण
समिति द्वारा जिले के सभी डंपिंग स्थलों का वर्चुअल निरीक्षण कराया जाएगा। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अवैध और अनधिकृत डंप साइटों का निरीक्षण कर रिपोर्ट एवं फोटोग्राफ समिति के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
साथ ही सभी नगरीय निकायों को कचरे के संग्रहण, परिवहन और निपटान के लिए केवल अधिकृत वाहनों का उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक 15 दिन में प्रगति रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

पर्यटन और ग्रामीण क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस
समिति पर्यटन स्थलों, तीर्थ स्थलों और अधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सफाई व्यवस्था विकसित करेगी। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में बीडब्ल्यूजीएस एवं ईबीडब्ल्यूजीआर प्रमाणन, लेगेसी वेस्ट की निगरानी, बंद बॉडी वाले कचरा वाहनों का उपयोग और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में प्रतिदिन कम से कम दो बार सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। लापरवाही मिलने पर संबंधितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्वच्छता और रिसाइक्लिंग को मिलेगा बढ़ावा
स्वच्छ भारत मिशन शहरी एवं ग्रामीण के तहत उपलब्ध बजट का कम से कम 30 प्रतिशत हिस्सा अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आरक्षित किया जाएगा। नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में वार्ड स्तरीय रैंकिंग जारी की जाएगी तथा नई कॉलोनियों में वेस्ट हैंडलिंग जोन विकसित किए जाएंगे।
समिति “रिड्यूस, रियूज और रिसाइकिल” की अवधारणा को बढ़ावा देने के साथ सीएसआर और पीपीपी मॉडल को भी प्रोत्साहित करेगी। विशेष प्रकोष्ठ की बैठक प्रत्येक माह आयोजित की जाएगी।



