आईआईटी-क ने सीबीएसई पोर्टल में ‘कमजोरियों’ की पहचान करने वाले एथिकल हैकर को किया नियुक्त

कोलकाता, पश्चिम बंगाल | 27 अप्रैल 2024
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कलकत्ता (IIT-K) ने साइबर सुरक्षा क्षेत्र में नवोन्मेषी पहल करते हुए एक अनूठा निर्णय लिया है। संस्थान के निदेशक, डॉ. मनींद्र अग्रवाल ने बताया कि आईआईटी-क ने साइबर सुरक्षा में प्रवीणता दिखाने वाले प्रतिभाशाली छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए एक नया बैचलर डिग्री प्रोग्राम शुरू किया है। इस कोर्स में दाखिला पारंपरिक जेईई (एडवांस्ड) परीक्षा के माध्यम से नहीं बल्कि एक हैकथॉन के जरिए होगा।
डॉ. अग्रवाल के अनुसार, यह पहल संस्थान की ओर से एक महत्वपूर्ण कदम है ताकि तकनीकी क्षमताओं के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान वाले छात्र साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में आगे आ सकें। “हम डिजिटल युग में सुरक्षा को प्राथमिकता देना चाहते हैं। इसलिए इस नए B.Tech प्रोग्राम में हम उन्हें परखेंगे जो भेद्यता पहचानने और समाधान सुझाने में दक्ष हैं,” उन्होंने कहा।
हैकथॉन, एक प्रतिस्पर्धात्मक आयोजन होता है जिसमें प्रतिभागी सीमित समय में निर्धारित कर्य को पूरा करते हैं। IIT-K में आयोजित होने वाले इस हैकथॉन में छात्रों को वास्तविक साइबर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना होगा, जहाँ उनकी समस्या सुलझाने की क्षमता और तकनीकी कौशल का परीक्षण होगा।
संस्थान की इस योजना से उम्मीद की जा रही है कि युवाओं में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और देश को उच्च योग्य विशेषज्ञ मिलेंगे जो वर्तमान और भविष्य की डिजिटल खतरों से निपटने में समर्थ हों।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक परीक्षाओं के बजाय व्यवहारिक कौशल पर आधारित चयन प्रक्रिया बेहतर परिणाम देगी। यह पहल न केवल तकनीकी शिक्षा में बदलाव लाएगी बल्कि भारत के साइबर सुरक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता और दक्षता को भी बढ़ावा देगी।
आईआईटी-क का यह कदम देश के लिए एक संकेत भी है कि शिक्षा प्रणाली में नयी सोच और नवाचार की आवश्यकता है। संस्थान विभिन्न तकनीकी और व्यावहारिक दृष्टिकोण को अपनाकर देश को तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
डिपार्टमेंट ऑफ साइबर सेक्युरिटी के प्रमुख ने कहा, “हैकथॉन आधारित प्रवेश प्रक्रिया युवाओं को अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान करेगी और इससे हमें ऐसे छात्र मिलेंगे जो न केवल सैद्धांतिक ज्ञान बल्कि व्यावहारिक अनुभव रखते हैं।”
इस पहल की सफलता से भविष्य में अन्य तकनीकी संस्थान भी इस तरह की प्रवेश प्रक्रिया अपनाने की संभावना जताई जा रही है जो शिक्षा के क्षेत्र में नई क्रांति ला सकती है। IIT-K की इस पहल से छात्र और विशेषज्ञ दोनों को ही काफी लाभ होने का अनुमान है।



