जंगल, जमीन और जल बचाने को आदिवासियों ने भरी हुंकार, सपा-कांग्रेस जिलाध्यक्षों को सौंपा ज्ञापन
किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में आदिवासी प्रतिनिधिमंडल ने राजनीतिक समर्थन की मांग की, पर्यावरण संरक्षण और विस्थापन के मुद्दे उठाए

ब्यूरो रिपोर्ट : सतीश पाण्डेय
सोनभद्र। किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा के नेतृत्व में सोमवार को आदिवासी-बनवासी समुदाय के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के जिलाध्यक्षों से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने जंगल, जमीन और जल की रक्षा के लिए राजनीतिक समर्थन और हस्तक्षेप की मांग की।
इस दौरान आदिवासी नेताओं ने कहा कि विकास के नाम पर उनके पूर्वजों की विरासत और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा ने कहा कि वन क्षेत्रों में बढ़ते औद्योगिक और परियोजना आधारित दबाव से आदिवासी समाज की आजीविका, संस्कृति और अस्तित्व पर संकट खड़ा हो रहा है। उन्होंने कहा कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन का आधार हैं।
“पेड़ हैं तो प्राण हैं” अभियान के सह-संयोजक गुलाब चेरो ने कहा कि एक भी पेड़ कटने नहीं दिया जाएगा और जंगलों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा। वहीं नगवां ब्लॉक संयोजक विन्दू खरवार ने कहा कि जंगल ही उनका घर है और वे अपनी पहचान को मिटने नहीं देंगे।
अभियान के जिला संयोजक रामसूरत खरवार ने जिले में स्थापित उद्योगों में स्थानीय और आदिवासी युवाओं को रोजगार मिलने के मुद्दे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर आदिवासियों को उनकी जमीन और जंगल से बेदखल करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि वन क्षेत्रों में प्रस्तावित परियोजनाओं, पेड़ों की कटाई और विस्थापन से जुड़े मामलों में जनभावनाओं का सम्मान किया जाए तथा जंगल, जमीन और जल की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी, ग्रामीण और किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस दौरान “जंगल बचाओ, जीवन बचाओ” और “पेड़ हैं तो प्राण हैं” जैसे नारों के साथ पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी अधिकारों की आवाज बुलंद की गई।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से रामसूरत खरवार, विन्दू अगरिया, रामहाल खरवार, गुलाब चेरो, दिनेश पनिका, टहलराम माझी, आकाश चौहान, शत्रुधन बिंद, सूरज कनौजिया, संजय बियार, सुजीत विश्वकर्मा, नागेंद्र धागर सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



