शिक्षा

छत्तीसगढ़ के राज्य विद्यालयों में हिंदू प्रार्थनाओं को अनिवार्य करने पर कांग्रेस ने कहा कि सरकार आरएसएस एजेंडा थोप रही है

रायपुर, छत्तीसगढ़ | 27 अप्रैल 2024

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के विद्यालयों में सुबह की सभा में राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय गान, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र को अनिवार्य करने के निर्णय ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर हंगामा मचा दिया है। सरकार का यह कदम शिक्षा के माध्यम से सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के उद्देश्य से बताया जा रहा है, लेकिन विपक्ष ने इसे आरएसएस एजेंडा थोपने की कोशिश करार दिया है।

प्रदेश के शिक्षा विभाग ने घोषणा की है कि प्रत्येक विद्यालय में अब से रोजाना सुबह की सभा में देशभक्ति और धार्मिक तत्वों को शामिल किया जाएगा। इस पर कांग्रेस पार्टी ने तीखा विरोध जताते हुए कहा कि यह कदम बच्चों के मन में सांप्रदायिकता पैदा करेगा और शिक्षा को पक्षपातपूर्ण बनाएगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, “यह सरकार अपनी विचारधारा को बच्चों पर जबरदस्ती थोप रही है, जो किसी भी दलीय लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।”

शिक्षकों और अभिभावकों में भी इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ लोग इसे बच्चों में राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए आवश्यक मानते हैं, जबकि अन्य इसे गैरजरूरी धार्मिक हस्तक्षेप समझते हैं। शिक्षक संघ ने इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए जल्द ही बैठक बुलाने का ऐलान किया है।

सरकार का कहना है कि दीप मंत्र, सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र जैसे तत्व भारतीय संस्कृति और शिक्षा का हिस्सा रहे हैं, और उन्हें विद्यालयों में शामिल करना बच्चों के मन में नैतिकता और अनुशासन पैदा करेगा। सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा, “हमारा उद्देश्य किसी भी धार्मिक भावनाओं का अनुचित इस्तेमाल नहीं, बल्कि बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है।”

इस विषय पर विभिन्न सामाजिक संगठन भी अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। कुछ ने इसे सांस्कृतिक संरक्षण का प्रतीक माना है, तो कुछ ने इसे धर्म आधारित परिवर्तन बताकर सावधानी बरतने की वकालत की है।

पूर्व में भी कई राज्यों में इस तरह के अनुष्ठान को लेकर विवाद रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी हैं कि शिक्षा अपना धर्मनिरपेक्ष स्वरूप बनाए रखे। इसके बावजूद इस तरह के कदम राजनीतिक बहस का केंद्र बने रहते हैं।

छत्तीसगढ़ की यह नई नीति अब किस तरह प्रदेश के शिक्षण वातावरण और सामाजिक सौहार्द पर प्रभाव डालेगी, यह देखना बाकी है। विपक्ष की शिकायतों के कारण सरकार पर इस फैसले को पुनर्विचार करने का भी दबाव बढ़ता जा रहा है।

इस बीच, विद्यालयों में अगले सत्र से इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं, और शिक्षकों को भी आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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