स्वास्थ्य

जैसे-जैसे भारत तेजी से वृद्ध हो रहा है, घर पर चिकित्सा देखभाल की जरूरत बढ़ रही है: क्या है बीमा में कमी

नई दिल्ली, भारत – भारत में पुरानी आबादी तेजी से बढ़ रही है और इसी बदलाव के साथ घर पर चिकित्सा देखभाल की मांग भी महत्वपूर्ण रूप से सामने आई है। डॉक्टर, गेरिएट्रिक केयर विशेषज्ञ और मरीजों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों का मानना है कि स्वास्थ्य बीमा नीतियों में केवल अस्पताल में भर्ती होने तक सीमित रहना अब पर्याप्त नहीं है।

मेडिकल प्रोफेशनल्स का कहना है कि आधुनिक उपचार और रिकवरी के लिए घर पर देखभाल आवश्यक है, खासकर वृद्ध रोगियों के लिए, जो अस्पताल जाने में अक्सर असुविधा और जोखिम महसूस करते हैं। इस बीच, बीमा कंपनियों की नीतियां अधिकतर अस्पताल में भर्ती होने और मेडिकल प्रक्रियाओं तक ही सीमित हैं, जिससे घर पर चिकित्सा सेवा की लागत कवर नहीं होती।

गेरियाट्रिक केयर विशेषज्ञ डॉ. सीमा अग्रवाल ने कहा, “घर पर देखभाल से न केवल मरीजों को आराम मिलता है, बल्कि उनकी रिकवरी भी बेहतर होती है। लेकिन कई बार परिवार आर्थिक बोझ के कारण इस सेवा का उपयोग करने से हिचकते हैं क्योंकि बीमा कवर उपलब्ध नहीं होता।” वे आगे बताती हैं कि बीमा कंपनियों को इस दिशा में कदम बढ़ाकर घर-आधारित देखभाल को भी अपनी पॉलिसी में शामिल करना चाहिए।

मरीजों के अधिकारों की वकालत करने वाले संगठन भी इस मुद्दे पर जोर देते हैं। उनका कहना है कि सरकार और बीमा प्रदाताओं को मिलकर ऐसी नीतियां बनानी चाहिए, जो पूरे मेडिकल प्रक्रिया को कवर करें। घर में दी जाने वाली नर्सिंग, पुनर्वास, और नियमित जांच जैसी सेवाओं का वित्तीय सहायता जरूरतमंद परिवारों को राहत दे सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वृद्ध रोगियों के लिए घर आधारित देखभाल तत्काल आवश्यक है क्योंकि अस्पतालों में भर्ती होने के साथ-साथ संक्रमण और तनाव का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी कारण से घर आधारित सेवाओं को प्रोत्साहित करके स्वास्थ्य प्रणाली को प्रभावी बनाया जा सकता है।

इस बीच, कई परिवार जो वृद्ध सदस्य की देखभाल कर रहे हैं, शिकायत करते हैं कि स्वास्थ्य बीमा की सीमाओं के कारण वे महंगे निजी नर्स या फिजियोथेरेपिस्ट को घर पर बुलाने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसे में उनकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ दोनों पर असर पड़ता है।

स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ कहते हैं कि बीमा क्षेत्र में सुधार के लिए व्यापक चर्चा और नीति निर्माण जरूरी है, ताकि घर पर देखभाल को भी कवर किया जा सके। यह न केवल वृद्ध और बीमार व्यक्तियों के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

भारत के तेजी से बदलते समाज में जैसे-जैसे वृद्धों की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे घर पर चिकित्सा देखभाल की भूमिका और भी अहम होती जाएगी। यह समय की मांग है कि घर आधारित देखभाल को बीमा कवरेज का हिस्सा बनाया जाए, ताकि हर मरीज को बेहतर, सुरक्षित और किफायती इलाज मिल सके।

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