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ICAR की नई खोज से डेयरी सेक्टर को बड़ी राहत, अब 10 दिन ज्यादा ताजा रहेगा पनीर

नई दिल्ली: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (NDRI), करनाल ने डेयरी उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीक विकसित की है, जो पनीर के उत्पादन और भंडारण में बड़ा बदलाव ला सकती है। संस्थान द्वारा विकसित एंटीमाइक्रोबियल कोएगुलेंट फॉर्मूलेशन (AMCF) तकनीक की मदद से पनीर की शेल्फ लाइफ लगभग 10 दिन तक बढ़ाई जा सकती है। इससे डेयरी किसानों, दूध उत्पादकों और खाद्य उद्योग को खराब होने वाले उत्पादों से होने वाले नुकसान में कमी आने की उम्मीद है।

AMCF तकनीक पनीर बनाने की प्रक्रिया के दौरान ऐसे एंटीमाइक्रोबियल तत्वों का उपयोग करती है, जो हानिकारक बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को नियंत्रित करते हैं। इसके कारण पनीर अधिक समय तक सुरक्षित रहता है और उसकी गुणवत्ता भी बनी रहती है। यह तकनीक उन डेयरी इकाइयों के लिए खास तौर पर फायदेमंद मानी जा रही है, जो बड़े पैमाने पर पनीर का उत्पादन करती हैं।

भारत में पनीर की मांग लगातार बढ़ रही है। होटल, रेस्टोरेंट, फूड प्रोसेसिंग कंपनियां और घरेलू उपभोक्ता बड़ी मात्रा में इसका उपयोग करते हैं। लेकिन कम शेल्फ लाइफ के कारण उत्पादकों को समय पर बिक्री नहीं होने पर नुकसान उठाना पड़ता है। नई तकनीक इस चुनौती को काफी हद तक कम कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के व्यावसायिक उपयोग से डेयरी किसानों को अपने उत्पाद दूर-दराज के बाजारों तक पहुंचाने का अधिक समय मिलेगा। इससे खाद्य अपव्यय कम होगा, उत्पाद की गुणवत्ता बनी रहेगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही यह तकनीक भारतीय डेयरी उद्योग को अधिक आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने में भी अहम भूमिका निभा सकती है।


तरीका 3: अब जल्दी खराब नहीं होगा पनीर, ICAR-NDRI ने विकसित की नई तकनीक; डेयरी किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली: पनीर बनाने वाले किसानों और डेयरी उद्योग के लिए अच्छी खबर है। ICAR के नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (NDRI), करनाल ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जिससे पनीर को पहले की तुलना में करीब 10 दिन अधिक समय तक सुरक्षित और ताजा रखा जा सकेगा। इस तकनीक का नाम Antimicrobial Coagulant Formulation (AMCF) है और इसे डेयरी क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

AMCF तकनीक पनीर निर्माण के दौरान ऐसे विशेष एंटीमाइक्रोबियल घटकों का उपयोग करती है, जो हानिकारक सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकते हैं। इससे पनीर की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है और उसके खराब होने की संभावना कम हो जाती है। यह तकनीक विशेष रूप से उन डेयरी उत्पादकों के लिए लाभकारी होगी, जिन्हें कम शेल्फ लाइफ के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

भारत में डेयरी उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है और किसान अब दूध के साथ-साथ पनीर, दही, घी और अन्य वैल्यू-एडेड उत्पादों के जरिए बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। ऐसे में पनीर की शेल्फ लाइफ बढ़ने से उन्हें अपने उत्पादों की बिक्री के लिए अधिक समय मिलेगा और दूरस्थ बाजारों तक पहुंच बनाना भी आसान होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाया जाता है, तो इससे खाद्य अपव्यय में कमी आएगी, उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाला पनीर मिलेगा और भारतीय डेयरी उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी। यही कारण है कि AMCF तकनीक को डेयरी सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार माना जा रहा है।

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