धार्मिक

पंढरपूर का वार्षिक महोत्सव महाराष्ट्र के शुद्धिकरण का प्रतीक है, संजय उपाध्याय ने इसका स्थान….

पंढरपुर की वार्षिक वारी का अर्थ है पूरे महाराष्ट्र का शुद्धिकरण। यह पूरी तरह से वारकरी समुदाय के लिए एक पर्व जैसा है। संत ज्ञानेश्वर माऊली ने पासायदान के माध्यम से यह विचार व्यक्त किया कि सारा विश्व अपने घर जैसा है। इसे इस वारी का एक हिस्सा माना जाना चाहिए, ऐसा प्रबोधन प्रसिद्ध वक्ताओं ने कहा।

भगवद् गीता और ज्ञानेश्वरी के संबंध को ध्यान में रखना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध के आरंभ में अर्जुन से जो भगवद् गीता में कहा, और संत ज्ञानेश्वर की ज्ञानेश्वरी—इन दोनों ग्रंथों के संबंध को पाठकों को पहले समझकर आनंदपूर्वक अध्ययन करना चाहिए। इससे पूरे जीवन का सार समझ में आता है। तभी ज्ञान की घागर (बाल्टी) सागर में बदलती है। संतों ने जिस समय साहित्य की रचना की, उसमें तत्कालीन परिस्थितियों की समझ स्पष्ट होती है। आज हम उसी पर चर्चा कर रहे हैं, और इससे उनके महत्व पर प्रकाश पड़ता है, ऐसे शब्दों में वक्ता संजय उपाध्ये ने कहा।

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