अध्ययन में पाया गया: विश्व के 94% बचपन कैंसर से होने वाली मौतें निम्न एवं मध्य आय वाले देशों में होती हैं

नई दिल्ली, भारत – बचपन कैंसर विश्व में बच्चों की मौतों का आठवां सबसे बड़ा कारण है। हाल के एक अध्ययन में यह सामने आया है कि बचपन कैंसर का वैश्विक बोझ, वैश्विक बचपन रोग और कैंसर के बोझ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और यह बोझ विशेष रूप से संसाधन सीमित क्षेत्रों में असमान रूप से अधिक है।
बचपन कैंसर के कारण होने वाली मौतों की संख्या विश्व स्तर पर चिंताजनक है, खासकर उन देशों में जहां स्वास्थ्य सुविधाएं और संसाधन सीमित हैं। विकसित देशों की तुलना में, निम्न और मध्य आय वाले देशों में बचपन कैंसर के कारण होने वाली मौतों की दर बहुत अधिक पाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह असमानता स्वास्थ्य सेवा प्रणाली, निदान की सीमाएं और उपचार तक पहुंच की कमी के कारण उत्पन्न होती है।
बचपन कैंसर के प्रकारों में ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, और ठोस ट्यूमर प्रमुख हैं, जो बच्चों की मौतों का मुख्य कारण बनते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य स्वास्थ्य संस्थान इस पर खास ध्यान दे रहे हैं ताकि बचपन कैंसर के कारण होने वाली असमानताओं को दूर किया जा सके और सभी बच्चों को बेहतर उपचार उपलब्ध हो सके।
अध्ययन के अनुसार, संसाधन सीमित स्थानों में बच्चों के कैंसर की पहचान में देरी, पर्याप्त दवा और उपचार के अभाव समेत कई बाधाएं हैं, जिनके कारण कैंसर का इलाज समय पर संभव नहीं होता। इसके परिणामस्वरूप कैंसर से बचने वाले बच्चों की संख्या कम होती जा रही है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि बचपन कैंसर के इलाज और निदान के लिए विशेष राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम बनाने की आवश्यकता है, ताकि विकासशील देशों में इसका प्रभावी मुकाबला हो सके। साथ ही, जागरूकता फैलाना और स्वास्थ्य सेवा के विस्तार से इस बीमारी से होने वाली मृत्युदर को कम किया जा सकता है।
इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि बचपन कैंसर से जुड़ी चुनौतियों को समझना और विश्व स्तर पर उचित कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है, जिससे बच्चों की जीवन रक्षा की जा सके और उनके उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।



