केंद्र ने डीजल और विमान ईंधन पर निर्यात शुल्क बढ़ाया

नई दिल्ली, भारत
केंद्र सरकार ने डीजल और विमान टरबाइन ईंधन (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क में वृद्धि की घोषणा की है। इस बढ़ोतरी का उद्देश्य घरेलू ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के दबाव को कम करना बताया जा रहा है। सरकार ने डीजल पर विंडफॉल टैक्स (अप्रत्याशित लाभ कर) को ₹55.5 प्रति लीटर और एटीएफ पर ₹42 प्रति लीटर कर दिया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
सरकार के इस कदम से अब डीजल और विमान ईंधन के निर्यातकों को अधिक शुल्क चुकाना होगा जिससे घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। यह नीति विशेष रूप से उन स्थितियों में बनाई गई है जब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव होता है और इससे आम जनता पर दबाव पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विंडफॉल टैक्स की यह वृद्धि घरेलू मांग और आपूर्ति के संतुलन को बेहतर बनाएगी और ईंधन की कालाबाज़ारी तथा निर्यात से होने वाली आपूर्ति कमी को रोकने में सहायक होगी। यह कर वृद्धि सरकार की ऊर्जा नीति के तहत आने वाले कदमों का हिस्सा है, जिसमें घरेलू ईंधन की उपलब्धता व किफायती दरों को प्राथमिकता दी जाती है।
स्रोतों के अनुसार, डीजल और एटीएफ की निर्यात दरों में वृद्धि से सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, जिसे ऊर्जा क्षेत्र के विकास और सार्वजनिक कल्याण योजनाओं में लगाया जाएगा। इसके अलावा, यह कदम ईंधन की कीमतों पर लगाम कसने की कोशिशों के बीच पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद करेगा।
इस नीति के लागू होने के बाद घरेलू परिवहन और विमानन उद्योग को भी राहत मिलेगी क्योंकि इन्हें ईंधन की सस्ती उपलब्धता सुनिश्चित होगी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यातकर्ताओं को इसकी वजह से चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इस फैसले को देश के आर्थिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक बताया है। मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम अनिवार्य है ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को उच्च कीमतों से बचाया जा सके।
सरकार इस बढ़ोतरी के प्रभावों की निगरानी करती रहेगी और जरूरत पड़ने पर आगे भी नियामक कदम उठाएगी ताकि ईंधन की कीमतें नियंत्रण में बनी रहें और आर्थिक स्थिरता बनी रहे।



