दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी से तीन-भाषा नीति के कार्यान्वयन को स्थगित करने का आग्रह किया

Bhopal, Madhya Pradesh | 27 अप्रैल 2024
केंद्र सरकार की तीन-भाषा नीति के लागू होने को लेकर विपक्ष के नेता और वरिष्ठ कांग्रेसी सदस्य दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसे फिलहाल स्थगित करने की मांग की है। यह अपील उन्होंने सीबीएसई कक्षा 9 के अभिभावकों की एक चिंता जताने वाली याचिका को ध्यान में रखते हुए की है, जो इस नीति के अनिवार्य क्रियान्वयन के विरोध में है।
दिग्विजय सिंह ने बताया कि “मैं यहाँ एक प्रतिनिधित्व अग्रेषित कर रहा हूँ, जो सीबीएसई कक्षा 9 के छात्रों के चिंतित अभिभावकों के एक समूह द्वारा प्राप्त हुआ है। वे इस सत्र के मध्य में तीन-भाषा नीति के अनिवार्य कार्यान्वयन का विरोध कर रहे हैं।” अभिभावकों का कहना है कि इस नई नीति के कारण बच्चों पर अनावश्यक दबाव बढ़ रहा है और उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
तीन-भाषा नीति के तहत छात्रों को हिंदी, अंग्रेजी के साथ-साथ एक अन्य क्षेत्रीय भाषा सीखनी अनिवार्य कर दी गई है। इसके समर्थक इस नीति को भारत में भाषाई एकता और राष्ट्रीय एकीकरण का माध्यम मानते हैं, जबकि विरोधियों का तर्क है कि यह बच्चों के लिए बोझ साबित हो रही है और उनकी मौलिक भाषाई पहचान पर भी असर डाल रही है।
दिग्विजय सिंह ने कहा, “सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे पर पुनर्विचार करे और अभिभावकों और शिक्षकों से व्यापक संवाद स्थापित करे ताकि इस नीति का प्रभाव बच्चों की शिक्षा पर अनुकूल हो। अचानक लागू की गई यह नीति कई परिवारों के लिए चिंता का विषय बन गई है।”
शैक्षणिक विशेषज्ञ भी इस बात पर सहमत हैं कि भाषाई नीतियाँ यदि उचित तैयारी और समन्वय के बिना लागू की जाती हैं तो इससे छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट आ सकती है। कई राज्यों ने भी इस नीति के प्रति विरोध जताया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय स्तर पर इस विषय पर अभी भी व्यापक सहमति की आवश्यकता है।
केंद्र सरकार ने फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन शिक्षा मंत्री ने पिछले सप्ताह कहा था कि तीन-भाषा नीति का उद्देश्य बच्चों में बहुभाषीय क्षमता बढ़ाना है और इसे सावधानीपूर्वक लागू किया जाएगा। हालांकि, अभिभावकों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए अब तक कोई स्थगन की घोषणा नहीं हुई है।
इस मुद्दे पर बढ़ते विरोध और चिंताओं के बीच यह देखना होगा कि सरकार कब तक नीति के कार्यान्वयन को लेकर अपना रुख स्पष्ट करती है और अभिभावकों व विद्यार्थियों की मांगों को ध्यान में रखती है। आगामी दिनों में इस विषय पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा और भी तीव्र होने की संभावना है।
इस बीच, दिग्विजय सिंह और अन्य विपक्षी नेता अभिभावकों के साथ मिलकर तीन-भाषा नीति के कार्यान्वयन पर पुनर्विचार की मांग को जोर-शोर से उठाएंगे, ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो और उनकी हितों का संरक्षण किया जा सके।



