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जनगणना 2027 का शेड्यूल जारी: 17 अगस्त से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, 1 सितंबर से घर-घर होगी गणना, जानें पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली: भारत सरकार ने जनगणना 2027 के दूसरे चरण ‘जनसंख्या गणना (Population Enumeration)’ का आधिकारिक शेड्यूल जारी कर दिया है। यह कार्यक्रम फिलहाल उन पहाड़ी और बर्फबारी वाले क्षेत्रों के लिए लागू होगा, जहां मौसम संबंधी चुनौतियों के कारण सामान्य समय पर जनगणना कराना संभव नहीं होता। सरकार ने इन इलाकों के लिए ऑनलाइन स्वयं-पंजीकरण, घर-घर जाकर जनगणना और डेटा सत्यापन की तारीखों की घोषणा कर दी है।

इस अधिसूचना में लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी प्रभावित क्षेत्र, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के चुनिंदा पहाड़ी इलाकों को शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में मौसम को ध्यान में रखते हुए जनगणना का कार्य पहले पूरा किया जाएगा।

जानिए कब क्या होगा

सरकारी नोटिफिकेशन के अनुसार, 17 अगस्त 2026 से 31 अगस्त 2026 तक नागरिक ऑनलाइन माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 1 सितंबर 2026 से 30 सितंबर 2026 तक जनगणना कर्मी घर-घर जाकर प्रत्येक परिवार की जानकारी एकत्र करेंगे।

जनसंख्या संबंधी आंकड़ों के सत्यापन का कार्य 1 अक्टूबर 2026 से 5 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा। सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 को इन क्षेत्रों के लिए रेफरेंस डेट भी तय किया है। इसी तारीख को आधार मानकर जनसंख्या से जुड़ी आधिकारिक जानकारी दर्ज की जाएगी।

जनगणना में किन सवालों के जवाब देने होंगे?

जनगणना के दौरान नागरिकों से परिवार और व्यक्तिगत जानकारी से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे जाएंगे। इनमें परिवार के सदस्यों की संख्या, नाम, आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, व्यवसाय, जन्म स्थान, मातृभाषा, धर्म, सामाजिक वर्ग, प्रवास से जुड़ी जानकारी और आवास संबंधी विवरण शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा घर में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी।

ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा

इस बार सरकार लोगों को ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन (Self Enumeration) की सुविधा भी दे रही है। यानी नागरिक तय समय के भीतर अपनी जानकारी स्वयं ऑनलाइन भर सकेंगे। इसके बाद जनगणना अधिकारी आवश्यक सत्यापन करेंगे। इससे पूरी प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और डिजिटल होगी।

देश के विकास में क्यों अहम है जनगणना?

जनगणना के आंकड़े केंद्र और राज्य सरकारों के लिए नीति निर्माण का महत्वपूर्ण आधार होते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, आवास, रोजगार और सामाजिक कल्याण जैसी योजनाओं का स्वरूप इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तय किया जाता है। यही वजह है कि सरकार कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में भी समयबद्ध तरीके से जनगणना पूरी करने पर जोर दे रही है।

सरकार द्वारा जारी इस शेड्यूल के साथ संबंधित राज्यों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। वहीं, देश के अन्य हिस्सों के लिए जनगणना का विस्तृत कार्यक्रम अलग से जारी किया जाएगा।

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