15 अगस्त पर क्यों याद आता है ‘दुल्हन चली’? महेंद्र कपूर की आवाज में आजादी का ऐसा गीत, जो हर पीढ़ी को करता है भावुक

मुंबई, महाराष्ट्र
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देशभक्ति गीतों की अपनी एक अलग दुनिया होती है। 15 अगस्त आते ही पुराने दौर के कई गीत रेडियो, टीवी, स्कूलों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुनाई देने लगते हैं। इनमें कुछ गीत ऐसे हैं जिनका असर समय बीतने के साथ कम नहीं हुआ। महेंद्र कपूर की आवाज में गाया गया ‘दुल्हन चली’ भी ऐसा ही गीत है।
फिल्म ‘पूरब और पश्चिम’ का यह गीत मनोज कुमार और सायरा बानो पर फिल्माया गया था। गीतकार इंदीवर ने इसके बोल लिखे थे, जबकि कल्याणजी-आनंदजी ने इसका संगीत तैयार किया था। गीत में भारत की आजादी और राष्ट्रीय ध्वज को एक अलग और बेहद खूबसूरत रूपक के जरिए पेश किया गया।
भारत को बनाया दुल्हन
‘दुल्हन चली’ की सबसे खास बात यह है कि इसमें देश को दुल्हन के रूप में दिखाया गया है। गीत में तीन रंगों वाली चोली के जरिए तिरंगे की ओर संकेत किया गया है।
देश और तिरंगे को दुल्हन की पोशाक से जोड़ने का यह विचार उस दौर के देशभक्ति संगीत में काफी अलग था। गीत सुनते हुए राष्ट्रीय ध्वज केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि देश की पहचान और गौरव के रूप में सामने आता है।
इसी वजह से यह गीत 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व के साथ गहराई से जुड़ गया।
मनोज कुमार की फिल्मों में देशभक्ति
मनोज कुमार का नाम हिंदी सिनेमा में देशभक्ति फिल्मों और गीतों के साथ मजबूती से जुड़ा है। उनकी फिल्मों में देश और राष्ट्रप्रेम से जुड़े विषयों को प्रमुखता मिली।
‘मेरे देश की धरती सोना उगले’, ‘है प्रीत जहां की रीत सदा’ और ‘अब के बरस तुझे धरती की रानी’ जैसे गीतों ने भी उनकी फिल्मों को अलग पहचान दी।
‘पूरब और पश्चिम’ भी इसी भावभूमि पर बनी फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में भारतीय संस्कृति, देश और विदेश के बीच तुलना तथा राष्ट्रप्रेम को प्रमुखता दी गई थी।
महेंद्र कपूर की आवाज की खासियत
महेंद्र कपूर उन गायकों में शामिल थे जिन्होंने हिंदी फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर में अपनी अलग पहचान बनाई। मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर, किशोर कुमार और मुकेश जैसे दिग्गजों के बीच भी महेंद्र कपूर की आवाज का अपना अलग प्रभाव था।
विशेष रूप से देशभक्ति गीतों में उनकी आवाज का ओज और ऊर्जा सुनने वालों पर गहरा असर डालता था। ‘दुल्हन चली’ भी इसका एक उदाहरण है।
महेंद्र कपूर ने हिंदी के अलावा पंजाबी, मराठी और गुजराती फिल्मों में भी गायकी की। मराठी सिनेमा में अभिनेता दादा कोंडके के लिए उन्होंने कई लोकप्रिय गीत गाए और उनकी आवाज वहां भी खास पहचान बनी।
आज भी 15 अगस्त की पसंद
आज डिजिटल संगीत और नए दौर के गीतों के बीच भी ‘दुल्हन चली’ अपनी जगह बनाए हुए है। स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में यह गीत अक्सर सुनाई देता है।
इसकी वजह केवल पुरानी यादें नहीं हैं। गीत का प्रतीकात्मक भाव, महेंद्र कपूर की आवाज, कल्याणजी-आनंदजी का संगीत और मनोज कुमार पर इसका फिल्मांकन मिलकर इसे ऐसा गीत बनाते हैं, जो हर बार 15 अगस्त के माहौल में नया असर पैदा करता है।
कई दशक बाद भी ‘दुल्हन चली’ यह याद दिलाता है कि देशभक्ति केवल नारों में नहीं, बल्कि संगीत, सिनेमा और संस्कृति के जरिए भी पीढ़ियों तक पहुंच सकती है।



