द्यानीिधि मारन ने पशु क्रूरता रोकथाम नियमों 2026 की समीक्षा की मांग की

DMK के लोकसभा सदस्य द्यानीिधि मारन ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित “प्रिवेंशन ऑफ क्रूरिटी टू एनिमल्स (कंट्रोल एंड सुपरविजन ऑफ एक्सपेरिमेंट, ब्रीडिंग एंड ट्रेडिंग ऑफ लैबोरेटरी एनिमल्स) रूल्स, 2026” की समीक्षा करने का आग्रह किया है। उन्होंने इसके संभावित प्रभावों को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
प्रस्तावित नियमों पर चिंता
अपने पत्र में द्यानीिधि मारन ने कहा कि हालांकि वैज्ञानिक शोध को सुव्यवस्थित करना आवश्यक है, लेकिन इस प्रक्रिया में पशु कल्याण के मानकों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाए कि नियमों में संस्थागत नैतिकता समितियों को बड़े जानवरों पर भी अधिक प्रयोगों की मंजूरी देने का प्रावधान, स्वतंत्र जांच की संभावनाओं को कैसे प्रभावित करेगा।
मरन ने कहा कि नियामक निरीक्षण को कमजोर करना पशु अधिकारों के हित में सही नहीं होगा और इस कारण इस विषय पर समुचित सतत निगरानी होनी चाहिए।
पशु कल्याण और वैज्ञानिक शोध का संतुलन
मारन ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक प्रगति और पशु कल्याण दोनों को साथ में सुनिश्चित करने की आवश्यकता है, ताकि किसी एक को दूसरे का बाधक न समझा जाए। उन्होंने केंद्र से अनुरोध किया कि वे इस प्रस्तावित मसौदे को वापस लेकर स्वतंत्र पशु कल्याण विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों, शोध संस्थानों और सिविल सोसाइटी संगठनों की सलाह से पुन: समीक्षा करें।
उन्होंने यह भी कहा कि नियमों में जंगली और समुदायिक पशुओं की सुरक्षा के लिए मजबूत प्रावधान, व्यवहार्य पशु कल्याण मानदंड और गढ़ी गई गैर-पशु अनुसंधान विधियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
दयानीिधि मारन के अनुसार केंद्र सरकार को पशु कल्याण के मामलों में कड़ी निगरानी सुनिश्चित कर प्रासंगिक गाइडलाइन्स को सख्ती से लागू करना चाहिए ताकि जानवरों के प्रति कोई भी उपेक्षा न हो।
उन्होंने कहा कि इस तरह के नियम समाज में वैज्ञानिक शोध के साथ पशु अधिकारों की रक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, इसलिए व्यापक सहमति से बने नियम ही कारगर साबित होंगे।
यह योजना वैज्ञानिक प्रगति को बढ़ावा देने के साथ-साथ नैतिक जिम्मेदारियों को भी न्यायसंगत रूप से सहेजेगी, इस हेतु अधिक पारदर्शिता एवं जवाबदेही जरूरी है।
इसलिए द्यानीिधि मारन ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वे वर्तमान प्रस्तावित नियमों को पुनः विचारार्थ वापस लें और सभी संबंधित हितधारकों के साथ मिलकर बेहतर, सभी के हित में कदम उठाएं।




