Gem Granites केस में सह-अभियुक्त शांति और महेंद्र सीम्हन की जमानत याचिका पर फैसला स्थगित

विशेष बाल यौन सुरक्षा न्यायालय ने मंगलवार, 29 सितंबर, 2026 को ‘Gem Granites’ प्रोपाइयेटर आर. वीरमणि के मामले में सह-अभियुक्त शांति और उनके पति महेंद्र सीम्हन की जमानत याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। वीरमणि पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण का आरोप लगा है।
अरेस्ट और आरोपों का संक्षिप्त विवरण
29 अगस्त को ग्रेटर चेन्नई पुलिस के इमोरल ट्रैफिकिंग प्रिवेंशन यूनिट (ITPU) ने वीरमणि, 84, शांति, 60, और महेंद्र सीम्हन, 63 को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, आरोपितों ने कई नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण किया है और पीड़ितों के बयान कानून के अंतर्गत दर्ज किए गए हैं।
पुलिस ने बताया कि वीरमणि ने बच्चों को शांति के घर रखा और यौन शोषण किया। इसके अलावा, शांति पर साक्ष्यों को नष्ट करने और अपराधी को बचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है। उन्हें वित्तीय लेनदेन में भी शामिल माना जा रहा है, जिसमें वीरमणि के खाते से हजारों करोड़ रुपए शांति के खाते में ट्रांसफर किए गए।
जमानत याचिका पर बहस
पुलिस ने तर्क दिया कि शांति और महेंद्र ने वीरमणि की मदद कर उसके अपराधों को अंजाम दिया। छानबीन के दौरान जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है ताकि पता चल सके कि क्या और भी नाबालिग लड़कियां इससे प्रभावित हैं। पुलिस का कहना है कि अगर दोनों को जमानत मिल गई तो वे गवाहों या साक्ष्यों में छेड़छाड़ कर सकते हैं और जांच से भाग सकते हैं।
जमानत याचिकाओं की सुनवाई सोमवार को POCSO विशेष न्यायाधीश एस. पद्मा के समक्ष हुई। जमानत याचिका दायर करने वालों के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किलों को सही ढंग से गिरफ्तार नहीं किया गया। गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर कोर्ट में पेश करना जरूरी होता है, जो पुलिस ने नहीं किया। मुवक्किल पहले ही पुलिस हिरासत में हैं और पूछताछ हो चुकी है, अतः उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।
वहीं पुलिस की ओर से प्रस्तुत वकील ने इसका कड़ा विरोध किया और कहा कि पुलिस आरोपी को गिरफ्तारी के बाद 40 दिनों तक कई बार हिरासत में लेकर पूछताछ कर सकती है। जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और इस समय जमानत मिलना जांच को प्रभावित करेगा। इसलिए याचिकाएं खारिज की जानी चाहिएं।
दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद न्यायाधीश ने जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा। अब अदालत की अंतिम टिप्पणी का इंतजार है जो इस मामले की दिशा तय करेगी।
यह मामला बाल यौन अपराधों के प्रति व्यवस्था और न्याय के अभिसरण की एक चुनौती प्रस्तुत करता है। आरोपी पक्ष की जमानतयाचिका पर फैसला समाज और न्याय व्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण कदम होगा।
इस लंबित मामले में आगे की सुनवाई और अंतिम फैसला समय-समय पर जनता की निगरानी में रहेगा। इस प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि बाल संरक्षण कानून का कितना प्रभावी पालन हो रहा है।




