उत्तर प्रदेश

सोशल मीडिया के बाद जंगी ऐप पर शिफ्ट होती थी बातचीत, एजेंसियां अलर्ट

सहारनपुर: मोहतशिम मामले की जांच में सामने आया है कि संदिग्ध संपर्क स्थापित करने के लिए पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था और बाद में बातचीत को अधिक गोपनीय माध्यमों पर ले जाया जाता था। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां और अधिक सतर्क हो गई हैं।

अधिकारियों के अनुसार, शुरुआत में इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क स्थापित किया जाता था। सामान्य बातचीत और दोस्ती के जरिए भरोसा जीतने के बाद संबंधित व्यक्ति को एक अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर आने के लिए कहा जाता था। वहां बातचीत अपेक्षाकृत अधिक निजी और सीमित दायरे में होती थी।

जांच एजेंसियों का कहना है कि यह तरीका नया नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में इसका इस्तेमाल बढ़ा है। सोशल मीडिया की व्यापक पहुंच के कारण किसी भी व्यक्ति तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी बढ़ा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं को विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है। किसी अनजान व्यक्ति से ऑनलाइन दोस्ती, नौकरी के आकर्षक प्रस्ताव या विदेश भेजने के दावे जैसे मामलों में पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही आगे बढ़ना चाहिए।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत संबंधित एजेंसियों को सूचना दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

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