मोदी-पुतिन की आज बड़ी बैठक, ऊर्जा और उर्वरक से लेकर S-400 और व्यापार संतुलन तक अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

बिश्केक, किर्गिस्तान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में द्विपक्षीय बैठक करेंगे। यह मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान होगी। दोनों नेताओं के बीच बातचीत भारत और रूस की विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा के साथ-साथ ऊर्जा, उर्वरक, रक्षा, व्यापार, भुगतान व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर केंद्रित रहने की संभावना है।
भारत के लिए रूस से ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति इस समय बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है। रूस भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। वहीं, कृषि क्षेत्र के लिए उर्वरक की नियमित उपलब्धता भी सरकार की प्राथमिकताओं में रहती है। दोनों देशों के बीच हालिया उच्चस्तरीय बातचीत में इन दोनों क्षेत्रों को विशेष महत्व दिया गया है।
24 अगस्त को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। बातचीत में ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु ऊर्जा और उच्च तकनीक सहयोग पर चर्चा हुई। पुतिन ने भारत के लिए उर्वरक आपूर्ति बढ़ाने की रूस की तैयारी का उल्लेख भी किया था।
बिश्केक में मोदी और पुतिन के बीच ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर विचार हो सकता है। वैश्विक बाजार में जारी अस्थिरता के बीच भारत की कोशिश होगी कि उसे ऊर्जा और उर्वरकों की स्थिर आपूर्ति मिलती रहे।
दूसरा बड़ा मुद्दा दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन है। भारत और रूस का द्विपक्षीय व्यापार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है, लेकिन रूसी ऊर्जा उत्पादों का इसमें बड़ा योगदान है। भारत चाहता है कि रूस भारतीय कंपनियों और उत्पादों के लिए अपने बाजार में अधिक अवसर उपलब्ध कराए। फार्मा, आईटी, कृषि, इंजीनियरिंग और उपभोक्ता उत्पादों में निर्यात बढ़ाने की संभावनाओं पर बातचीत हो सकती है।
रक्षा सहयोग भी दोनों नेताओं की चर्चा में महत्वपूर्ण स्थान रख सकता है। एस-400 वायु रक्षा प्रणाली से जुड़ी शेष आपूर्ति, मिसाइलों और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता, रखरखाव तथा भारत में मरम्मत सुविधाओं जैसे विषयों पर विचार किया जा सकता है। भारत और रूस रक्षा क्षेत्र में सह-उत्पादन तथा स्थानीय स्तर पर स्पेयर पार्ट्स तैयार करने की दिशा में भी सहयोग बढ़ाते रहे हैं।
हालांकि, इन विषयों के बैठक में उठने की संभावना है, लेकिन किसी नए रक्षा सौदे या एस-400 से जुड़े नए निर्णय को बैठक से पहले निश्चित नहीं माना जा सकता।
भुगतान व्यवस्था भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में बदलती परिस्थितियों के बीच भारत और रूस व्यापार भुगतान को अधिक सुरक्षित और व्यावहारिक बनाने के विकल्पों पर चर्चा कर सकते हैं।
बातचीत में यूक्रेन और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दे भी शामिल हो सकते हैं। भारत लगातार अपनी रणनीतिक स्वायत्तता के तहत विभिन्न देशों के साथ संवाद बनाए रखता है।
मोदी और पुतिन की अगली मुलाकात सितंबर में नई दिल्ली में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भी होने की संभावना है। ऐसे में बिश्केक बैठक को दोनों देशों के बीच आने वाले महीनों के लिए आर्थिक, रणनीतिक और रक्षा सहयोग की दिशा तय करने वाली अहम बातचीत के तौर पर देखा जा रहा है।



