Vodafone Idea से हिस्सेदारी बेचेगी भारत सरकार, इन्वेस्टर्स की तलाश में कंपनी; US बेस्ड फंड की पैनी नजर

सरकार ने वोडाफोन आइडिया (Vi) से निवेशकों की तलाश का दायरा बढ़ाने को कहा है, ताकि सरकार कंपनी से अपनी संभावित निकासी को आसान बना सके। Vi में सरकार की 49% हिस्सेदारी है। एक अमेरिकी फंड हाउस ने निवेश में दिलचस्पी दिखाई है।
HighLights
- सरकार ने Vi से निवेशकों का दायरा बढ़ाने को कहा।
- अमेरिकी फंड हाउस ने वोडाफोन आइडिया में रुचि दिखाई।
- भारत सरकार Vi में 49% हिस्सेदारी बेचने को तैयार।
टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) को लेकर एक खबर है कि सरकार कंपनी से संभावित निकासी को आसान बनाने के लिए Vi से निवेशकों की तलाश का दायरा बढ़ाने के लिए कहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने कंपनी से कहा कि वह घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय, दोनों तरह के विकल्पों पर विचार करे। अब कंपनी ऐसे निवेशकों की तलाश में जो सरकार की हिस्सेदारी को कम करने में उसकी मदद कर सके।
रिपोर्ट्स के अनुसार Vi में हिस्सेदारी खरीदने के लिए दो बड़े घरेलू कॉर्पोरेट समूहों ने अलग-अलग समय पर दिलचस्पी दिखाई थी। हालांकि, बात आगे नहीं बढ़ सकी। अब सरकार ने टेलीकॉम कंपनी को निवेशकों की तलाश का दायरा बढ़ाकर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को भी इसमें शामिल करने को कहा है। यह बात सरकार में बड़े पद पर काम कर रहे दो अधिकारियों ने बताई।
अमेरिकी फंड हाउस की Vi पर नजर
कहा जा रहा है कि अमेरिका स्थित एक फंड हाउस वोडाफोन आइडिया पर नजर बनाए हुए है। फंड हाउस ने निवेश करने की दिलचस्पी भी दिखाई है। इस फंड हाउस के संस्थापक भारतीय मूल के हैं। फंड हाउस टेलीकॉम सेक्टर में परिचालन का अनुभव रखने वाले किसी घरेलू साझेदार (Vi) के साथ हाथ मिला सकता है।
वोडाफोन आइडिया पर भारी कर्ज होने के कारण उसके अस्तित्व का रास्ता अनिश्चित लग रहा है। कंपनी दो बड़े प्रतिद्वंद्वियों Reliance Jio और Bharti Airtel के हाथों लगातार अपने ग्राहक खो रही है। यही कारण है कि सरकार ने उसे निवेशकों की तलाश के लिए दायरा बढ़ाने को कहा है।
भारत सरकार की कितनी है हिस्सेदारी
वोडाफोन आइडिया में भारत सरकार की 49 फीसदी हिस्सेदारी है। सरकार ने फरवरी 2025 में कंपनी के ऊपर बकाया ब्याज के बदले Vi में हिस्सेदारी बढ़ाई थी। सरकार ने बीते साल Vi के बकाया AGR के 87,695 करोड़ रुपये को अगले 5 साल के लिए बढ़ा दिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार अगर कंपनी को नया निवेशक मिलता है और सरकार हिस्सेदारी बेचती है तो नया निवेशक कंपनी में बहुमत नियंत्रण हासिल कर सकता है।
भारत सरकार की हिस्सेदारी के अलावा, टेलीकॉम कंपनी में वोडाफोन ग्रुप की 16.07 फीसदी, आदित्य बिड़ला ग्रुप की 9.5 फीसदी, संस्थागत निवेशकों की 11.6 फीसदी और गैर-संस्थागत निवेशकों की 13.83 फीसदी हिस्सेदारी थी।


