रुपया डॉलर के मुकाबले 9 पैसे गिरकर 92.63 पर बंद

नई दिल्ली, भारत
विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया सोमवार को कमजोर होता हुआ दिखाई दिया। विदेशी कारोबारी माहौल को लेकर असमंजस में थे क्योंकि लेबनान पर इजरायल के लगातार बमबारी के चलते कर्ज और निवेश की धारणा प्रभावित हुई। इस बीच, ईरान ने चेतावनी दी कि अगर इजरायल के हमले जारी रहे, तो वह वार्ता से बाहर निकल सकता है। यह नाजुक स्थिति निवेशकों की धारणा पर भारी पड़ी।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि नियंत्रण में बनी हुई संघर्ष विराम की स्थिति भी बाजार को स्थिरता प्रदान नहीं कर सकी है। ईरान की वार्ता से बाहर निकलने की धमकी ने विदेशी निवेशकों के मन में अस्थिरता का माहौल पैदा कर दिया है। ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपया गिरावट में रहा और अंततः 92.63 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले बंद स्तर से 9 पैसे कम है।
विश्लेषकों के अनुसार, मध्य पूर्व की इस जटिल राजनीति के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ है। इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी रुपया को प्रभावित किया है क्योंकि भारत तेल आयातक देश है।
वहीं विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने कहा कि निवेशक मांग कमजोर हो गई है और वे खतरे को लेकर सतर्क हैं। इसका असर रुपये की स्थिति पर साफ दिखा। भारतीय रिजर्व बैंक ने अभी तक इस स्थिति में हस्तक्षेप नहीं किया है, लेकिन बाजार की लगातार निगरानी जारी है।
कुल मिलाकर, विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता के चलते रुपये की स्थिति कमजोर बनी रहने की संभावना है, जब तक कि मध्य पूर्व में परिस्थितियां स्थिर नहीं हो जातीं। निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह वित्तीय सलाहकार दे रहे हैं। लेबनान पर बमबारी और ईरान की वार्ता संबंधी चेतावनी से वैश्विक और घरेलू बाजार प्रभावित हो रहे हैं, जो आने वाले समय में वित्तीय बाजारों की दिशा निर्धारित करेगी।
इस बीच सरकार और रिजर्व बैंक की नीतियों पर भी नजर बनी हुई है ताकि किसी भी तरह की वित्तीय अनिश्चितता को कम किया जा सके। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक संकेतकों की सहायता से रुपया में स्थिरता लाई जा सकती है, बशर्ते विदेशों में परिप्रेक्ष्य अनुकूल रहे।



