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Parle की कहानी: 60 हजार रुपये से शुरू हुआ सफर, आज हर घर तक पहुंचा ‘Parle-G’

नई दिल्ली: भारतीय बाजार में दशकों से लोगों का भरोसा जीतने वाली Parle Products एक बार फिर चर्चा में है। वजह बनी है कंपनी की मशहूर ‘मेलोडी’ टॉफी, जिसे प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni को उपहार में दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर ‘मेलोडी’ और Parle दोनों ट्रेंड करने लगे।

Parle की शुरुआत 1929 में मोहनलाल दयाल चौहान ने मुंबई के विले पार्ले इलाके से की थी। उस दौर में भारत में विदेशी कंपनियों का दबदबा था और बिस्किट आम लोगों के लिए लग्जरी माने जाते थे। ऐसे समय में चौहान ने भारतीय ग्राहकों के लिए सस्ते और बेहतर खाद्य उत्पाद बनाने का सपना देखा।

उन्होंने जर्मनी से आधुनिक मशीनें मंगवाईं और लगभग 60 हजार रुपये निवेश कर एक छोटी फैक्ट्री शुरू की। उनके पांच बेटों ने भी कारोबार को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। कंपनी का नाम ‘पारले’ भी उसी इलाके के नाम पर रखा गया, जहां इसकी फैक्ट्री स्थापित हुई थी।

शुरुआत में कंपनी टॉफी और मिठाइयां बनाती थी, लेकिन 1939 में ग्लूकोज बिस्किट लॉन्च करने के बाद इसका कारोबार तेजी से बढ़ा। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना को सप्लाई मिलने से कंपनी को बड़ा बाजार मिला।

बाद में ‘Parle Gluco’ नाम से बिकने वाला यह बिस्किट 1960 के दशक में Parle-G बन गया। इसका स्वाद, कीमत और उपलब्धता इतनी लोकप्रिय हुई कि यह देश के हर वर्ग तक पहुंच गया। स्कूल बैग, रेलवे यात्रा और चाय के साथ Parle-G भारतीय संस्कृति का हिस्सा बन गया।

1983 में लॉन्च हुई Melody टॉफी ने भी कंपनी को नई पहचान दी। “मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?” विज्ञापन लाइन ने इसे बच्चों और युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया।

आज Parle Products भारत की सबसे बड़ी FMCG कंपनियों में गिनी जाती है और Parle-G दुनिया के सबसे ज्यादा बिकने वाले बिस्किट ब्रांड्स में शामिल माना जाता है।

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