दिल्ली

Supreme Court Verdict: लोन विवाद सुलझने के बाद नहीं चलेगा आपराधिक मुकदमा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बैंक ऋण विवादों से जुड़े मामलों में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि बैंक और कर्जदार के बीच समझौता हो चुका है और विवाद का निपटारा हो गया है, तो उसी मामले में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने एक कारोबारी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि बैंकिंग लेन-देन मूल रूप से व्यावसायिक गतिविधि है और जब दोनों पक्ष सहमति से विवाद समाप्त कर चुके हों, तो मुकदमे को जारी रखना उचित नहीं है।

मामला एक कारोबारी और बैंक के बीच ऋण विवाद का था। कारोबारी ने डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) के समक्ष समझौता कर 6.49 करोड़ रुपये के बकाया ऋण के बदले 4.25 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। समझौते के बाद विवाद समाप्त हो गया था।

हालांकि करीब दो साल बाद बैंक ने कारोबारी के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज करा दिया। बैंक की शिकायत पर CBI ने जांच कर चार्जशीट दाखिल की और आरोप लगाया कि कारोबारी ने कथित रूप से फर्जी ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर कैश क्रेडिट लिमिट बढ़वाई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समझौते के बाद आरोपी के दोषी साबित होने की संभावना बेहद कम है। ऐसे में मुकदमा जारी रखना केवल अनावश्यक मुकदमेबाजी को बढ़ावा देगा।

अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से व्यापारिक माहौल प्रभावित हो सकता है और कारोबारी समझौता करने से बच सकते हैं। यह फैसला बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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