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ईरान के राष्ट्रपति पेزش्कियन ने IRGC नियंत्रण के चलते सम्राट के नाम इस्तीफा सौंपा: रिपोर्ट में खारिज की गई आधिकारिक दावों

तेहरान, ईरान – हाल ही में यह खबरें आई हैं कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेزش्कियन ने अपनी इस्तीफा पत्र सर्वोच्च नेता को सौंपा है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने दावा किया है कि वे निर्णय प्रक्रिया से बाहर कर दिए गए हैं और ईरान इस्लामिक रिवॉल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अत्यधिक नियंत्रण के कारण प्रभावी ढंग से शासन नहीं कर पा रहे हैं।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पेزش्कियन ने अपने इस्तीफे में इस स्थिति को गतिरोध बताया, जहां उन्होंने सरकारी फैसलों से अयोग्य समझा जाना और सैन्य संगठन के निरंकुश नियंत्रण के बीच काम करना असंभव बताया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस तरह के माहौल में वे देश के हित में कोई प्रभावशाली नीति नहीं बना पा रहे हैं।

हालांकि, राष्ट्रपति कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन रिपोर्टों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि यह विदेशी नेटवर्क की अफवाहें और मनगढ़ंत प्रचार हैं। उनका कहना है कि राष्ट्रपति पेزش्कियन ने न तो इस्तीफा दिया है और न ही वे सरकार के निर्णयों से विमुख हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सारा मामला राजनीतिक साजिश और भ्रम फैलाने की कोशिश है, जिसका देश की आंतरिक स्थिरता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में राजनीतिक व सैन्य संस्थानों के बीच संतुलन हमेशा से जटिल रहा है। IRGC, जो सेना की तुलना में अधिक प्रभावशाली माना जाता है, ने कई बार राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में अपनी भूमिका बढ़ाई है, जिससे निर्वाचित अधिकारियों को अपने कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

देश के अंदर और बाहर कई विश्लेषक इस संकट को ईरानी राजनीतिक प्रणाली की स्थिरता पर एक चुनौती के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, राष्ट्रपति कार्यालय ने इसे स्पष्ट किया है कि सरकार एकजुट है और देश की जनता के हित में काम कर रही है।

इस विवाद को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी नजर बनाए हुए है, क्योंकि ईरान की आंतरिक राजनीति सीधे तौर पर क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक कूटनीति को प्रभावित करती है। वे यह देखना चाहते हैं कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और ईरान की नेतृत्व व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव आता है या नहीं।

अंत में, इस पूरी परिस्थिति ने ईरानी राजनीतिक मंच पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जो आगे समय के साथ ही स्पष्ट होंगे। फिलहाल, स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और देश के लोग निगरानी बनाए हुए हैं कि सरकार और सैन्य संगठन के बीच संतुलन कैसे स्थापित होगा।

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