PUC सर्टिफिकेट नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा कार मालिक, 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों को लेकर फिर छिड़ी बहस

नई दिल्ली, दिल्ली
दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियों को लेकर एक बार फिर कानूनी और प्रशासनिक विवाद सामने आया है। एक लग्जरी वोल्वो कार के मालिक ने सुप्रीम कोर्ट में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि उनकी गाड़ी प्रदूषण जांच में सफल होने के बावजूद उन्हें पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जा रहा। उनका आरोप है कि पीयूसी केंद्रों के सॉफ्टवेयर में लागू प्रतिबंध के कारण यह समस्या उत्पन्न हो रही है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, उनकी वोल्वो XC-60 डीजल कार सभी निर्धारित उत्सर्जन मानकों को पूरा करती है, लेकिन वाहन की उम्र 10 वर्ष पूरी होने के कारण सॉफ्टवेयर स्वतः ही आवेदन को अस्वीकार कर देता है। इसके चलते उन्हें पीयूसी प्रमाणपत्र नहीं मिल पा रहा और कई स्थानों पर वाहन में ईंधन भरवाने में भी परेशानी हो रही है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश खन्ना ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ के समक्ष कहा कि प्रीमियम और लग्जरी श्रेणी की गाड़ियों का जीवनकाल अधिक होता है। यदि ऐसी गाड़ियों को केवल उम्र के आधार पर स्क्रैप करने या उपयोग से रोकने की स्थिति बनती है तो वाहन मालिकों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि पीयूसी केंद्रों के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनके सॉफ्टवेयर सिस्टम में ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत निर्धारित आयु सीमा पार कर चुकी डीजल गाड़ियों को प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकता, भले ही वे प्रदूषण जांच में पूरी तरह सफल हों।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर को अपने आदेश में कहा था कि केवल वाहन की उम्र के आधार पर 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। ऐसे में याचिकाकर्ता का कहना है कि मौजूदा सॉफ्टवेयर व्यवस्था अदालत के आदेश की भावना के अनुरूप नहीं है।
अब यह मामला केवल एक वाहन मालिक तक सीमित नहीं माना जा रहा है। यदि अदालत इस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करती है तो दिल्ली-एनसीआर के हजारों वाहन मालिकों को राहत मिल सकती है, जो अपनी गाड़ियों का नियमित रखरखाव करते हैं और प्रदूषण मानकों का पालन भी कर रहे हैं।



