टाइगर हमले में बहू की मौत के दो हफ्ते बाद पेड़ पर लटकता मिला जेठ का शव
एक के बाद एक हादसों ने यादव परिवार को तोड़ा, पुलिस आत्महत्या के कारणों की जांच में जुटी

ब्यूरो चीफ राहुल शीतलानी | सब तक एक्सप्रेस
उमरिया। इंदवार थाना क्षेत्र के ग्राम कुदरी (चँसुरा) निवासी यादव परिवार पर दुखों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। करीब दो सप्ताह पहले टाइगर के हमले में परिवार की बहू ममता यादव की मौत हुई थी। परिवार इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि बुधवार को एक और दुखद घटना सामने आ गई। ममता यादव के जेठ तीरथ यादव (37 वर्ष) का शव अमरपुर चौकी क्षेत्र के ग्राम देवगवा में एक आम के पेड़ से लटका मिला।
जानकारी के अनुसार तीरथ यादव इन दिनों अपनी ससुराल ग्राम देवगवा में रह रहे थे। बुधवार सुबह ग्रामीणों ने उनका शव गमछे के फंदे से पेड़ पर लटका देखा। घटना की सूचना मिलने पर अमरपुर पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस जांच कर रही है।
बताया जा रहा है कि 16 मई को परिवार की बहू ममता यादव तेंदूपत्ता तोड़ने जंगल गई थीं, जहां टाइगर के हमले में उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना से पूरा परिवार गहरे सदमे में था। अब तीरथ यादव की मौत ने परिवार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
ग्रामीणों के अनुसार यादव परिवार के पास लगभग दो से ढाई एकड़ कृषि भूमि थी, जिससे परिवार का गुजारा चलता था। कुछ वर्ष पहले जंगली हाथियों ने खेतों की फसलें नष्ट कर दी थीं। आर्थिक संकट और लगातार बढ़ती परेशानियों से परेशान होकर परिवार के मुखिया कन्ना सिंह यादव ने आत्महत्या कर ली थी।
पिता की मौत के बाद परिवार ने मवेशी पालन के जरिए जीवन को संभालने का प्रयास किया, लेकिन एक रात तेंदुए ने बाड़े में घुसकर कई मवेशियों को मार डाला। इसके बाद परिवार की एक बेटी गंभीर बीमारी के कारण इलाज के दौरान जबलपुर मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ गई।
लगातार हुई इन घटनाओं ने पूरे परिवार को भीतर तक झकझोर दिया है। बहू और जेठ की एक महीने के भीतर हुई मौत के बाद घर में मातम पसरा हुआ है। गांव के लोग भी इस दुखद घटनाक्रम से स्तब्ध हैं और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।
फिलहाल पुलिस तीरथ यादव की मौत के कारणों की जांच कर रही है। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में इस परिवार पर जितनी विपत्तियां आई हैं, उतनी शायद ही किसी अन्य परिवार ने झेली हों।



