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17 साल बाद भारत लौटने की तैयारी, लेकिन पहली ही उड़ान को लौटना पड़ा वापस; SAS की वापसी में क्यों आई रुकावट?

मुंबई: स्कैंडिनेवियाई एयरलाइन SAS (स्कैंडिनेवियन एयरलाइंस) की भारत वापसी का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। करीब 17 वर्षों के बाद एयरलाइन ने कोपेनहेगन और मुंबई के बीच सीधी उड़ान सेवा फिर से शुरू करने की घोषणा की थी। लेकिन यह वापसी उम्मीद के मुताबिक नहीं हो सकी। मुंबई के लिए रवाना हुई पहली ही उड़ान को बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा।

मंगलवार रात को कोपेनहेगन से उड़ान भरने वाली फ्लाइट SK969 को बुधवार सुबह मुंबई पहुंचना था। हालांकि उड़ान के दौरान स्थिति बदल गई और विमान को अजरबैजान के हवाई क्षेत्र से वापस कोपेनहेगन लौटने का निर्णय लेना पड़ा।

एयरलाइन के अनुसार, इस फैसले के पीछे कोई तकनीकी खराबी या सुरक्षा संबंधी समस्या नहीं थी। मुख्य कारण आवश्यक रेगुलेटरी मंजूरी का समय पर नहीं मिल पाना रहा। कंपनी को उम्मीद थी कि संबंधित अधिकारियों से अंतिम स्वीकृति उड़ान के दौरान प्राप्त हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

SAS ने अपने बयान में कहा कि भारत में सेवाएं दोबारा शुरू करने के लिए पिछले कई महीनों से तैयारियां चल रही थीं। परिचालन व्यवस्था, उड़ान योजना और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया गया था। इसके बावजूद अंतिम मंजूरी लंबित रहने के कारण पहली उड़ान को निर्धारित गंतव्य तक नहीं ले जाया जा सका।

इस घटना से उन यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा, जिन्होंने भारत आने के लिए इस उड़ान को चुना था। एयरलाइन ने प्रभावित यात्रियों को सहायता देने और वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।

विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन में विभिन्न देशों के विमानन नियामकों की मंजूरी बेहद महत्वपूर्ण होती है। कई बार सभी तैयारियां पूरी होने के बावजूद अंतिम स्वीकृति में देरी होने से ऐसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

SAS ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा और सभी नियमों का पालन उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। कंपनी संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और जल्द ही लंबित औपचारिकताओं को पूरा करने का प्रयास कर रही है।

हालांकि पहली उड़ान का अनुभव निराशाजनक रहा, लेकिन एयरलाइन को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में आवश्यक मंजूरियां मिल जाएंगी और कोपेनहेगन-मुंबई मार्ग पर नियमित उड़ान सेवाएं शुरू हो सकेंगी। भारत और यूरोप के बीच बढ़ते हवाई यातायात को देखते हुए SAS की वापसी को अब भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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